मेहता ने पूछा भुर्जी पाव बेचनेवाले के पास कहां से आये हजार करोड़ रूपये

जब मामला करोड़ों रूपये की कमाई से जुड़ा हो,तो लोगों का या नेताओं का व्यक्तिगत विवाद किस निचले स्तर तक जा सकता है,इसका एक ताजा उदाहरण है महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और बीजेपी के विधायक नरेन्द्र मेहता का आपसी विवाद।दरअसल इन दोनों नेताओं का निर्वाचन क्षेत्र मीरा भाईंदर महानगरपालिका के अंतर्गत आता है और मीरा भाईंदर महानगरपालिका में बीजेपी को बहुमत प्राप्त है। मीरा भाईंदर महानगरपालिका के अंतर्गत बड़े पैमाने पर बहुमंजिली और गगनचुम्बी ईमारतों के निर्माण कार्य चल रहे हैं और ऐसा माना जाता है कि इन ईमारतों में से ज्यादातर के निर्माण कार्य में, नरेन्द्र मेहता की कंपनी 7/11 की भागीदारी रहती है। नरेन्द्र मेहता चूकि बीजेपी के विधायक हैं और मीरा भाईंदर महानगरपालिका में बीजेपी को बहुमत दिलाने में, उनकी मह्त्वपूर्ण भूमिका रही है,इसलिए पालिका प्रशासन पर उनका दबदबा बहुत ज्यादा है। यही बात प्रताप सरनाईक को पच नही रही है और वह बार बार नरेन्द्र मेहता के उपर तरह तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहते हैं। इस बार उन्होंने इसके लिए नरेन्द्र मेहता के भांजे और आर्किटेक्ट यश कोठारी तथा एक पूर्व पुलिस अधिकारी रवि सावंत का सहारा लिया है और यह आरोप लगाया कि इनके जरिए मीरा भाईंदर की दो ईमारतों के निर्माण कार्य में, एक बड़ा घोटाला किया गया है। इस दौरान प्रताप सरनाईक ने रवि सावंत पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए यह कहा कि इस बात की गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि एक अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारी के पास इतना पैसा कहां से आया।प्रताप सरनाईक के इन आरोपों को आड़े हाथों लेते हुए,नरेन्द्र मेहता ने रवि सावंत का बचाव करते हुए कहा कि रवि सावंत 35 साल पुलिस अधिकारी रहे हैं और अवकाश प्राप्त के बाद वह बिल्डर बन गये तो सरनाईक के पेट में दर्द हो रहा है,लेकिन सरनाईक ने स्वयं 25 वर्षों में भुर्जी पाव बेचने से लेकर एक हजार करोड़ तक की संपत्ति का सफर, कैसे तय किया,वह इसका खुलासा क्यों नही करते।मीरा भाईंदर की सामान्य जनता इस विवाद से बेहद आश्चर्यचकित है और यह सवाल पूछ रही है कि जब दोनों पक्ष राज्य में एक साथ सरकार चला रहे हैं फिर मीरा भाईंदर में एक दूसरे की चड्डी बनियान क्यों उतार रहे हैं।



