रश्मिता पोपेटा के खिलाफ मंदा म्हात्रे को मैदान में उतारा

महाराष्ट्र के विभिन्न राजनीतिक दलों को विभाजित कर उसका फायदा उठाने में माहिर,मोदी और फड़णवीस की निगाह, अब नवी मुम्बई के प्रकल्पग्रस्तों को विभाजित करने की ओर है। नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल को,नवी मुम्बई के प्रकल्पग्रस्तों के मसीहा दि बा पाटिल का नाम दिये जाने को लेकर,पिछले वर्ष जो प्रकल्पग्रस्त एक मंच पर एक साथ दिखाई दे रहे थे,अब उनमें भी दरार डालने का सिलसिला शुरू हो गया है।
नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल को शुरू हुये आज लगभग 8 महीने हो चुके हैं,मगर इसके उद्घाटन से कई महीने पहले,प्रकल्पग्रस्तों ने इस विमानतल का नाम दि बा पाटिल के नाम पर रखे जाने की जो मांग बेहद जोर शोर से राज्य और केन्द्र सरकार के सामने रखी थी,उसपर अभी तक कोई निर्णय नही हो पाया है। इसको लेकर प्रकल्पग्रस्तों के एक बड़े वर्ग में फिर से नाराजगी उभरने लगी है और इस नाराजगी को तब और ज्यादा बल मिल गया,जब रश्मिता पोपेटा नामक एक महिला ने इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया। रश्मिता पोपेटा के आमरण अनशन को तब एक बड़ा समर्थन प्राप्त होने लगा,जब आमरण अनशन के कारण उनकी तबियत दिनोंदिन बिगड़ने लगी।
रश्मिता पोपेटा के आमरण स्थल पर बड़ी मात्रा में युवा प्रकल्पग्रस्त इकठ्ठा होने लगे और उन्होंने अपने ही स्थानीय नेताओं और विधायकों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया। इसके बाद इस आन्दोलन का समर्थन करने भिवंडी के सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा,किसान नेता बालाराम पाटिल,शिवसेना यूबीटी नेता बबन पाटिल और आरपीआई नेता जगदीश गायकवाड भी पहूंच गये। फिर 8 जुलाई को कलंबोली से मंत्रालय तक के मार्च का निर्णय लिया गया। 8 जुलाई को इस आन्दोलन में शामिल सभी बड़े नेताओं सहित सैकड़ों की संख्या में अन्य प्रकल्पग्रस्तों को हिरासत में ले लिया गया। मगर इस आन्दोलन में नवी मुम्बई के चारो प्रकल्पग्रस्त विधायक गणेश नाईक,मंदा म्हात्रे,प्रशांत ठाकुर और महेश वालदी की अनुपस्थिती और उनके असहयोग के खिलाफ आन्दोलनकारियों में जबरदस्त गुस्सा देखा गया था।
अब इस गुस्से का जवाब देने सबसे पहले बेलापूर की विधायक मंदा म्हात्रे सामने आई हैं। उन्होंने राज्य सरकार और केन्द्र सरकार पर विश्वास जताते हुए यह कहा कि यह दोनों ही सरकार दि बा पाटिल साहब के नाम पर,बेहद सकारात्मक है और जल्द ही इसका कोई निर्णय सामने आ जायेगा । मंदा ताई ने नये रूप से शुरू किये गये आन्दोलन पर कड़ा प्रहार करते हुये यह कहा कि कुछ लोग प्रकल्पग्रस्तों की भावना का गलत फायदा उठाते हुये,नवी मुम्बई की कानून व्यवस्था को प्रभावित करना चाहते हैं,मगर उनकी मंशा को हम कामयाब नही होने देंगे। मंदा ताई की इस भूमिका से रश्मिता पोपेटा और उनके समर्थकों के बीच नाराजगी पसरनी शुरू हो गई है और मंदा ताई को पहला जवाब आरपीआई नेता जगदीश गायकवाड की तरफ से दिया गया है। गायकवाड के अनुसार रश्मिता पोपेटा द्वारा शुरू किया गया यह आन्दोलन तबतक नही रूकेगा,जबतक नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल को दि बा पाटिल का नाम न दे दिया जाये। इस नयी परिस्थिती के उत्पन्न होने के बाद नवी मुम्बई के प्रकल्पग्रस्तों में विभाजन स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।



