नवी मुम्बई अवैध निर्माण के जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित करने का जारी हुआ निर्देश

मुम्बई तपास नवी मुम्बई में लगातार बढ़ते जा रहे अवैध निर्माण को रोकने के लिए, जिस कदम को उठाये जाने की मांग पिछले कई महीनों से करता आ रहा है,उस मांग पर अब मुम्बई उच्च न्यायालय ने भी अपनी मुहर लगा दी है। मुम्बई उच्च न्यायालय ने नवी मुम्बई के अवैध निर्माण कार्य से जुड़े एडवोकेट किशोर शेट्टी की,एक न्यायालय अवमान याचिका की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि बिना नवी मुम्बई महानगरपालिका के अधिकारियों की मिलीभगत के,इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य को अंजाम नही दिया जा सकता,इसलिए सबसे पहले उन संबंधित अधिकारियों की पहचान की जानी जरूरी है,जिनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण कार्य किये गये हैं।मुम्बई उच्च न्यायालय के सर्वश्रेष्ठ जजों में शामिल जस्टिस गडकरी और जस्टिस कमलखट्टा की खंडपीठ ने, अपनी प्रसिद्धि के अनुरूप ही इस अवमान याचिका की सुनवाई करते हुए,नवी मुम्बई महानगरपालिका आयुक्त को यह निर्देश जारी किया है कि वह तीन हफ्ते के अंदर,जिम्मेदार पालिका अधिकारियों की सूची बनाकर उच्च न्यायालय के समक्ष पेश करें और यह भी बतायें कि वह इन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करनेवाले हैं। उच्च न्यायालय ने आगे की सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।मुम्बई उच्च न्यायालय के इस कड़े रूख के बाद कई वर्तमान पालिका अधिकारियों सहित कुछ सेवानिवृत अधिकारियों पर भी पालिका आयुक्त की गाज गिर सकती है। सेवानिवृत्त अधिकारियों में पूर्ण उपायुक्त पटनिगीरे,पूर्व विभाग अधिकारी नागरे,पूर्व विभाग अधिकारी मढ़वी,पूर्व विभाग अधिकारी तायड़े,पूर्व विभाग अधिकारी तांडेल यह कुछ ऐसे नाम है जिनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण कार्य हुए हैं। इसी तरीके से वर्तमान में घणसोली,ऐरोली,कोपरखैरणे,तुर्भे, नेरूल और बेलापूर विभाग में पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण कार्य किए जाने के प्रमाण मिलते हैं। इन अवैध निर्माण कार्यों में पालिका अधिकारियों के साथ साथ सिडको के अधिकारियों की भी जबर्दस्त मिलीभगत है। उम्मीद है कि उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद सिडको प्रशासन भी अपने जिम्मेदार अधिकारियों की एक सूची बनायेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की पहल करेगा।



