
कहते हैं कि जब पाप का घड़ा भरने लगता है तो समझ लो उसके फूटने की बारी आ चुकी है। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को देशद्रोही की संज्ञा दी जा रही है और अब लोग उसे जेल में डालने की मांग कर रहे हैं। राजीव कुमार ने तो देश में चुनाव आयोग को बदनाम करने का कार्य किया ही लेकिन उनकी जगह पर नियुक्त हुए नये चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तो, चुनाव आयोग को पूरी तरीके से लोकतंत्र का हत्यारा बना दिया।पिछले कुछ महीनों से सरकार और सर्वोच्च न्यायालय की मेहरबानियों की बदौलत,अहंकार से भरे ज्ञानेश कुमार भले ही आम मतदाताओं से, उनके मत के अधिकार को भी छिनने की पूरी साजिश को सफल बनाने में जुटे हों,मगर अब वह अपने ही लोगों के आरोप से ऐसे घिर गये हैं कि पूरे देश में उनके नाम की थू थू हो रही है और उन्हे खुलेआम देश का गद्दार और लोकतंत्र का हत्यारा कहा जा रहा है। वैसे भी भारत में एक कहावत है कि जब किसी का जुल्म हद को पार करने लगता है तो उसके जुल्म का हिसाब करने,मनुष्य के रूप में स्वयं भगवान प्रकट होते हैं। ऐसे ही दो भगवानों का जन्म स्वयं चुनाव आयोग के दफ्तर में हो चुका है और इन भगवानों को सार्वजनिक करने का कार्य इंडियन एक्सप्रेस ने कर दिया है।दरअसल केन्द्रीय चुनाव आयोग के तीन आयुक्तों में से दो ने, कई बार ज्ञानेश कुमार के मनमाने निर्णयों के खिलाफ लिखित रूप से गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थी,मगर अपने आकाओं के आशिर्वाद की बदौलत ज्ञानेश कुमार ने सभी आपत्तियों को नजरअंदाज कर अपनी मनमानी जारी रखी। लेकिन पता नही कहां से इंडियन एक्सप्रेस को इन सारी आपत्तियों की जानकारी हाथ लग गई और उसने इसे सार्वजनिक कर दिया।इसके बाद तो पूरे देश में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के साथ साथ आम मतदाताओं का भी गुस्सा फूट पड़ा, क्योंकी ज्ञानेश कुमार और बीजेपी की आपसी मिलीभगत से, अबतक 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं और आम मतदाता को बेवजह अपने ही देश में अपनी नागरिकता सिद्ध करनी पड़ रही है। पूरे देश में अचानक पैदा हुए इस आक्रोश को लपकने में,काॅकरोच जनता पार्टी ने भी कोई देरी नही की और ज्ञानेश कुमार को देश का सबसे बड़ा गद्दार बताते हुए,उनके तुरंत इस्तीफे की मांग कर डाली। काॅकरोच जनता पार्टी ने इसके लिए ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर उन्होंने 48 घंटे में इस्तीफा नही दिया तो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे वाले आन्दोलन को फिर दोहराया जायेगा।



