उर्मेश उदानी और उनके साथीदार पर कस सकता है शिकंजा

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में ट्रस्ट जमीन घोटाले में,एक ऐसा निर्णय सुनाया है,जिसके बाद नवी मुम्बई में यह चर्चा शुरू हो गई है कि नवी मुम्बई के सबसे बड़े भूखंड घोटालेबाज उर्मेश उदानी पर क्या नये सिरे से शिकंजा कस सकता है। ज्ञात हो कि नवी मुम्बई में उर्मेश उदानी उस शख्स का नाम है,जिसने सबसे ज्यादा भूखंड घोटालों को अंजाम दिया है और इसके जरिए सैकड़ों करोड़ की संपति न केवल खुद अर्जित की है,बल्कि अपने भागीदारों को भी करोड़ों रूपये का गैर आर्थिक फायदा कराया है। उर्मेश उदानी के भूखंड घोटालों में सबसे प्रमुख भूखंड घोटाला विभिन्न ट्रस्टों से जुड़े सैकड़ों एकड़ के भूखंड घोटालों का है,जिसमें अबतक एक दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुके हैं,मगर उदानी हमेशा अपने राजनीतिक पहुंच और पैसे की बदौलत केस को रफा दफा करने में सफल हो जाता है।मगर अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रस्ट की जमीन से जुड़े,2007 के एक भूखंड घोटाले को लेकर जो अपना फैसला सुनाया है,यह फैसला उर्मेश उदानी के भूखंड घोटालों के खिलाफ पुलिस और जांच एजेन्सियों को एक नई ताकत दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी ट्रस्ट की जमीन व्यापक जनहित के लिए या फिर किसी महत्वपूर्ण देशहित या राज्यहित के लिए उपयोग में लाई जा सकती है न की किसी ट्रस्टी के निजी फायदे के लिए। इस ऑब्जर्वेशन के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस भूखंड घोटाले के आपराधिक जांच को भी अपनी मंजूरी दे दी।सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद जो लोग,वर्ष 1999 से नवी मुंबई में किये जा रहे ट्रस्ट के भूखंड घोटालों को लेकर,पिछले कुछ सालों से अपनी आवाज बुलंद करते आये हैं,उनकी आवाज को अब एक नया बल मिल गया है और उम्मीद की जा रही है कि जिस भूखंड घोटाले को दबाने में उर्मेश उदानी के साथ सिडको, महसूल विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पिछले कई सालों से लगे हुए हैं,अब उस घोटाले की जांच को फिर से उजागर करने में शिकायतकर्ताओं को नई सफलता मिल सकती है।



