सोनम वांगचूक को जबरदस्ती अस्पताल ले जाना,पड़ सकता है भारी

पिछले 21 दिनों से केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर, दिल्ली के जंतर मंतर पर,काॅकरोच जनता पार्टी और देश के प्रसिद्ध पर्यावरण वैज्ञानिक सोनम वांगचूक के संयुक्त आन्दोलन में,तब एक बड़ा मोड़ आ गया जब 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचूक को दिल्ली पुलिस जबरदस्ती उठाकर अस्पताल ले गई। इसके बाद जिस तरीके से देशभर के सैकड़ों प्रसिद्ध चेहरों के द्वारा,केन्द्र सरकार के नियत और अहंकार को लेकर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया,उससे ऐसा लग रहा है कि कहीं केन्द्र सरकार ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी तो नही मार ली है।दिल्ली पुलिस आज सुबह 7 बजे डाक्टरों के वेश में,सोनम वांगचूक के स्टेज पर पहुंची और आनन फानन में उन्हे बिस्तर सहित उठाकर,पुलिस वैन में लादकर अस्पताल ले गई। दिल्ली पुलिस ने इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश का सहारा लिया,जिसमें सोनम वांगचूक के स्वास्थ का ख्याल रखने की सलाह दिल्ली प्रशासन को दी गई थी। दिल्ली पुलिस के इस हरकत को केन्द्र सरकार से जोड़ते हुए,लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने इसे एक कायराना हरकत की संज्ञा दे डाली और यह भी कहा कि सोनम वांगचूक के त्याग के कारण जिस तरीके से,पूरा देश एक छतरी के निचे आ रहा था,उसको लेकर केन्द्र सरकार 20 जुलाई के उस आन्दोलन के एलान से डर गई, जिसमें संसद मार्च का आह्वान किया गया था। केवल राजनीतिक पार्टी के लोग नही,बल्कि अनेक,सामाजिक,सास्कृतिक और मजदूर-किसान संगठनों ने भी केन्द्र सरकार के इस कायरतापूर्ण हरकत की जमकर आलोचना की है। सोनम वांगचूक को अस्पताल में भर्ती कराये जाने के बाद,उनकी जगह पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन करने की घोषणा,काॅकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने की। सोनम वांगचूक की पत्नी ने कहा कि अगर 20 जुलाई तक सोनम वांगचूक जंतर मंतर तक नही लौटे तो संसद मार्च के कार्यक्रम का नेतृत्व वह स्वयं करेंगी। आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि केन्द्र सरकार की इस कायराना हरकत के खिलाफ,देशभर के विपक्षी सांसद एकजुट होकर 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक मार्च के इस अभियान में भाग ले सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो केन्द्र सरकार को आम जनता की नजर में ,एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।



