एक निलंबित पुलिस अधिकारी भी था बलात्कार में शामिल

महाराष्ट्र में बढ़ते अपराध का मूल स्रोत क्यों राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों को माना जाता है,इसका एक बेहद ही घिनौना उदाहरण, ठाणे ग्रामीण के पड़घा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से सामने आया है। यहां भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक नरेन्द्र पवार और एक निलंबित पुलिस अधिकारी शैलेष पाटिल पर, एक शादीशुदा महिला के साथ सामूहिक बलात्कार का सनसनीखेज मामला दर्ज किया गया है।बलात्कार का यह मामला जब पिड़िता के कहने से पुलिस स्टेशन में दर्ज नही किया गया तो कांग्रेसी नगरसेविका कांचन कुलकर्णी के पास पिड़िता मदद के लिए पहुंची। पिड़िता की बातों को सुनने के बाद और पिड़िता के पास मौजूद कुछ सबूतों को देखने के बाद, कांचन कुलकर्णी पिड़िता को लेकर स्वयं पुलिस स्टेशन पहुंची और एफआईआर दर्ज करने के लिए जिद करने लगी। जब पुलिस स्टेशन ने उनकी बात नही मानी तो कांचन ने सीधे पुलिस महासंचालक से बात की और फिर पुलिस महासंचालक के आदेश पर एफआईआर दर्ज किया गया।कांचन की मानें तो पिड़ित महिला अपने एक पारिवारिक विवाद के समाधान के लिए पहले नरेन्द्र पवार से मिली थी। इसके बाद नरेन्द्र पवार ने उसे पड़घा पुलिस स्टेशन की हद में मौजूद एक फार्म हाउस पर बुलाया और उसके समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। पिड़ीत महिला जब नरेन्द्र पवार के बताये फार्म हाउस पर पहुंची तो वहां निलंबित पुलिस अधिकारी शैलेष पाटिल भी मौजूद था। इन दोनों ने महिला को एक कमरे में बुलाया और उससे शराब पीने का आग्रह किया। महिला के मना करने पर और वहां से बाहर निकलने की कोशिश करने पर नरेन्द्र पवार और शैलेष पाटिल ने रिवाल्वर के दम पर उसे धमकाते हुए जबरदस्ती शराब पीने के लिए मजबूर किया और फिर उसे धमकाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इस दौरान इन दोनों ने महिला को बहुत गंदे गंदे काम करने पर भी मजबूर किया।कांचन कुलकर्णी ने इस घृणित अपराध के लिए नरेन्द्र पवार और शैलेष पाटिल दोनों के तुरंत गिरफ्तारी की मांग की । इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद, नरेन्द्र पवार ने बीजेपी के भटक्या विमुक्ति सेल के प्रदेश अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा दे दिया है।



