सैकड़ों की संख्या में शामिल वकीलों ने,चुनाव आयोग के कार्यालय तक की पहुंचने की कोशिश

पिछले कुछ महीनों में जिस तरीके से नरेन्द्र मोदी जी का भरोसा,आम लोगों के अंदर घटा है,कुछ इसी तरीके से भारत के मतदाताओं का भरोसा,ईव्हीएम से घटा है। देश के हजारों मतदाताओं को यह शंका है कि ईव्हीएम के जरिए उनके मतों की चोरी की जा रही है,जिसे पकड़ पाने का उनके पास कोई साधन भी मौजूद नही है। अब इसी आशंका के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट से जुड़े कुछ वकीलों ने ‘ईव्हीएम हटाओ और लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ ईव्हीएम के खिलाफ एक बड़े आन्दोलन की शुरूवात कर दी है।इस आन्दोलन के पहले चरण में आज 17 सितंबर को, सर्वोच्च न्यायालय के डी गेट से केन्द्रीय चुनाव आयोग के कार्यालय तक पैदल मार्च का आयोजन किया गया था। इस मार्च में न केवल सैकड़ों की संख्या में वकील शामिल हुए बल्कि हजारों की संख्या में आम मतदाता भी शामिल हुए। हालांकि इस मार्च को पुलिस ने बीच में ही रोक दिया और आन्दोलन में शामिल सिर्फ पांच लोगों के शिष्टमंडल को ज्ञापन के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाने की इजाजत प्रदान की। इसके बाद आन्दोलनकारियों के शिष्टमंडल ने,चुनाव आयोग के कार्यालय में जाकर वहां के अधिकारियों को अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने के बाद इस शिष्टमंडल ने चुनाव आयोग को 10 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर उससे पहले उनकी मांगें नही मानी गई तो 10 अक्टूबर से जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन आन्दोलन की शुरूवात की जायेगी।इस आन्दोलन का नेतृत्व मुम्बई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी जी कोलते पाटिल,एडवोकेट भानु प्रताप सिंह,एडवोकेट महमूद प्राचा और एडवोकेट बलराम मल्लिक करते नजर आ रहे थे। हालांकि यह आन्दोलन जब स्वयं पूर्व न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों द्वारा किया जा रहा है,तब एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यह वकील चुनाव आयोग से यह क्यों नही पूछते कि भारत के सभी चुनावों में सभी सीटों पर ईव्हीएम से चुनाव कराने का निर्णय किस कानून के तहत लिया गया है,जबकि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव, जिस आरपी एक्ट के अंतर्गत कराये जाते हैं,उसके धारा 59 में चुनाव के लिए बैलेट पेपर को अनिवार्य बताया गया है और धारा 61 ए में ईव्हीएम को सिर्फ एक वैकल्पिक साधन बताया गया है। यहां तक कि आरपी एक्ट में धारा 61 ए को, जिस संसदीय संशोधन के द्वारा शामिल किया गया है,उस संशोधन प्रस्ताव में भी कुछ सिमीत सीटों पर ईव्हीएम से चुनाव कराने को मंजूरी दी गई है। मगर देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी या वकील चुनाव आयोग से इसको लेकर सवाल नही कर रहे, यह बेहद आश्चर्यजनक है।



