एसआईआर के भरे हुए मूल फाॅर्म की हजारो प्रति बीजेपी के कार्यकर्ता से बरामद

भारत की वर्तमान चुनावी प्रक्रिया में,बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच अवैध गठबंधन की चर्चा और सबूत वैसे तो देशभर से आते रहते हैं,मगर इस बार इसका प्रत्यक्ष गवाह नवी मुम्बई की धरती भी बनी है। ज्ञात हो कि महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया 17 अगस्त को खत्म हो चुकी है और चुनाव आयोग ने अपना ड्राफ्ट लिस्ट भी जारी कर दिया है। इस ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में 1 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम, मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं। अभी इसपर चर्चा चल ही रही थी कि नवी मुम्बई के खारघर क्षेत्र में ऐसी घटना घट गई,जिससे चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच अवैध गठबंधन की पोल एक बार फिर खुल गई।दरअसल खारघर के एक जिराॅक्स की दूकान पर, मनसे के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के एक कार्यकर्ता को,हजारो भरे हुए एसआईआर के फाॅर्म के साथ धर दबोचा। इसके बाद इस बीजेपी कार्यकर्ता को, सारे भरे हुए फाॅर्म के साथ खारघर पुलिस स्टेशन लाया गया और इस कार्यकर्त्ता पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। खारघर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किये जाने से इंकार किये जाने पर,पुलिस थाने में हंगामा का माहौल भी पैदा हो गया।सवाल यह उठता है कि जब 17 अगस्त को एसआईआर की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है,फिर जो फाॅर्म चुनाव आयोग के कब्जे में होने चाहिए थे,वह बीजेपी के किसी कार्यकर्ता के पास कैसे पहूंच गये और बीजेपी कार्यकर्ता ने, इन फाॅर्म को किस उद्देश्य के साथ अपने पास रखा था, या इन फाॅर्मस का जिरोक्स कराने की कोशिश कर रहा था ? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि इतनी बड़ी घटना,जिसे सरकारी दस्तावेजों की चोरी भी कहा जा सकता है,उसपर खारघर पुलिस ने बिना विलंब एफआईआर क्यों नही दर्ज किया। हालांकि पुलिस ने यह आश्वासन दिया है कि इस घटना की पूरी गंभीरता से जांच की जायेगी और अगर इसमें कोई आपराधिक कृत्य सामने आता है,तो किसी भी दोषी को बख्शा नही जायेगा,मगर यह घटना भारतीय लोकतंत्र की निष्पक्षता से रक्षा करने का संकल्प लेनेवाले, चुनाव आयोग के लिए बेहद ही शर्मनाक और बदनामीकारक है।



