चुनावी मैदान के बाद न्यायालय में भी हार का करना पड़ा सामना

ऐसा लगता है कि पिछले कुछ महीनों से,नवी मुम्बई के सर्वेसर्वा कहे जानेवाले गणेश नाईक के राजनीतिक स्वास्थ्य को किसी की नजर लग गई है। महाराष्ट्र के वन एवं पर्यावरण म॔त्री होने के बाद भी,गणेश नाईक पिछले कुछ दिनों में नवी मुम्बई की राजनीति में, काफी बैकफूट पर जाते दिखाई दे रहे हैं। नवी मुम्बई में खतरनाक और जर्जर ईमारतों के पुनर्विकास का मुद्दा हो या नवी मुम्बई महानगरपालिका के सभागृह नेता सागर नाईक के भ्रष्टाचार का मुद्दा,उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे से टकराहट का मुद्दा हो या अपनी ही पार्टी की विधायक मंदा ताई के विरोध का,हर जगह गणेश नाईक की नीति फेल होती दिखाई दे रही है। नया मामला नवी मुम्बई में एक बड़े हाॅस्पीटल के निर्माण का है,जिसको लेकर बेलापूर की विधायक मंदा म्हात्रे और गणेश नाईक के बीच विवाद और गहरा गया था। दरअसल मंदा ताई के प्रयास से नवी मुंबई के बेलापूर में,नवी मुम्बई महानगरपालिका की तरफ से 800 बेड की क्षमता वाले एक अस्पताल के निर्माण का निर्णय लिया गया था और इसके लिए सिडको में करीब 60 करोड़ रूपये भरकर पालिका ने, अस्पताल के लिए जमीन भी ले ली थी। मगर गणेश नाईक इस अस्पताल के विरोध में थे और उनका कहना था कि अस्पताल की जगह पर पहले से एक खेल का मैदान स्थापित था,जिसे हटाकर वहां अस्पताल का निर्माण नही किया जाना चाहिए और अस्पताल के लिए किसी अन्य पर्याय जगह को ढ़ूंढ़ना चाहिए।गणेश नाईक और मंदा ताई के बीच पैदा हुआ यह विवाद,मुम्बई उच्च न्यायालय की दहलीज पर भी पहुंच गया। यह विवाद फोर्टी प्लस नामक एक खेल संस्था द्वारा, मुम्बई उच्च न्यायालय की दहलीज पर ले जाया गया था और यह अपील की गई थी कि खेल के मैदान पर अस्पताल का निर्माण नही होना चाहिए। मगर उच्च न्यायालय ने इस याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि न तो इस भूखंड का आवंटन सिडको की तरफ से किसी अन्य संस्था को किया गया था और न ही यह भूखंड सिडको के रिकाॅर्ड में खेल के मैदान के रूप में आरक्षित है। न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए बेलापूर की विधायक मंदा म्हात्रे ने अप्रत्यक्ष रूप से,गणेश नाईक की जमकर आलोचना की है।न्यायालय के इस निर्णय के बाद, कानून के जानकार गणेश नाईक के इस प्रयास को एक अपरिपक्व कदम बता रहे हैं और इसे अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने की संज्ञा दे रहे हैं।



