
नवी मुम्बई के सुरक्षा विहीन तालाबों में डूबकर, पिछले तीन वर्षों में लगभग एक दर्जन से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है,मगर इसके बावजूद नवी मुम्बई महानगरपालिका प्रशासन,इन तालाबों पर तैराकी जानने वाले सुरक्षा रक्षकों को तैनात करने में पूरी तरह असफल रही है। 20 अक्टुबर के दिन ऐसी ही एक दर्दनाक घटना, वाशी स्थित कोपरी तालाब में घटी,जहां दुर्गा विसर्जन के बाद तालाब में अर्पित किये गये छुट्टे पैसे को इकठ्ठा करने के उद्देश्य से कुछ बच्चे तालाब पर गये हुए थे और तालाब की सिढ़ियों पर गिरे पैसे को इकठ्ठा कर रहे थे। मगर इस दौरान दो बच्चे अचानक सिढ़ियों की बजाये गहरे पानी में चले गये और डुबने लगे। इनको डुबता देखकर कुछ लोगों ने आवाज भी लगाई,मगर उस वक्त वहां तैराकी जानने वाले किसी व्यक्ति के मौजूद नही रहने के कारण,डूबते हुए बच्चों को बचाया नही जा सका।कोपरी तालाब में डुबकर जिन दो बच्चों की मृत्यू हुई है,उसमें 10 वर्षीय गणेश गुप्ता और 8 वर्षीय गोलू मंसूरी का नाम शामिल है। ऐसा नही है कि नवी मुम्बई के तालाबों में डुबकर,मासूमों की गई जान की यह पहली घटना है,बल्कि इससे पहले घणसोली,रबाले,शिरवणे,दिघा और कोपरखैरणे की तालाबों में भी इस तरह की घटना घट चुकी है। मगर अपने आपको श्रीमंत कहनेवाली नवी मुम्बई महानगरपालिका, विकास के नाम पर वैसे तो कई फालतू कामों के उपर प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रूपये खर्च कर देती है,लेकिन जो कार्य सीधे मासूमों और इंसानों की जिन्दगी से जुड़ा है, उसपर चंद लाख रूपये खर्च करके वह तैराकी में निपुण सुरक्षा रक्षकों की नियुक्ति नही कर सकती। यह विकास के परिभाषा की अजब विडंबना है।



