मुम्बई उच्च न्यायालय का स्पष्ट ईशारा

नवी मुम्बई के अवैध निर्माण कार्य की गूंज पिछले कई दिनों से मुम्बई उच्च न्यायालय की दहलीज पर गूंज रही है। अब इस गूंज में दो नये तथ्यों का समावेश हो गया है। जिम्मेदार पालिका अधिकारियों को द॔डित करने का आदेश सुनाने के बाद,मुम्बई उच्च न्यायालय ने,अब स्थानीय राजनेताओं को यह चेतावनी दी है कि अगर वह अवैध निर्माण की कार्रवाई के खिलाफ बाधा बने तो उन्हे बख्शा नही जायेगा। न्यायालय ने राजनेताओं के साथ साथ उन विकासकों पर भी न्यायिक बंदूक तान दी है,जिन्होंने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर और उनपर अवैध बहुमंजिली ईमारतों का निर्माण कर,करोड़ों की अवैध कमाई की है। न्यायालय ने ऐसे सभी विकासकों का पूरा ब्यौरा न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश पालिका और सिडको प्रशासन को दिया है।दरअसल नवी मुम्बई के कई स्थानीय राजनेताओं ने स्वय॔ भूमाफिया की भूमिका अदा की है और अवैध बहुमंजिली ईमारतों के जरिए करोड़ों की कमाई की है। इसलिए जब भी पालिका या सिडको प्रशासन की तरफ से इनके अवैध ईमारतों के खिलाफ कोई तोड़क कार्रवाई की जाती थी,तो यह अपने राजनीतिक समर्थकों के साथ भयानक हंगामा खड़ा कर देते थे। इस बात की सच्चाई जब पालिका और सिडकों के वकीलों ने न्यायालय के सामने रखी तब न्यायालय ने इसको बेहद गंभीर प्रकरण मानते हुए,स्थानीय नेताओं के लिए चेतावनी जारी की। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह उन विकासकों को भी आजाद नही छोड़ सकता,जिन्होंने नवी मुम्बई जैसे सुनियोजित शहर में, इतने बड़े पैमाने पर अवैध बहुमंजिली ईमारतों का निर्माण किया है। इसलिए न्यायालय ने पालिका और सिडको प्रशासन को यह निर्देशित किया है कि वह 4 अगस्त तक सभी जिम्मेदार विकासकों की सूची,उनके ईमारतों के साथ न्यायालय को सौंपे। न्यायालय के इस कड़े रूख के अवैध निर्माण के जिम्मेदार कई विकासकों का जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है।



