
एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में, कुछ नारे बेहद जोर शोर से लगाये जा रहे थे,जिसमें ‘सारे अपराधी कहां मिलेंगे,बीजेपी के दफ्तर में’ और ‘सारे बलात्कारी कहां मिलेंगे,बीजेपी के दफ्तर में, यह दोनों नारे सामान्य लोगों को, वैसे तो बहुत अमर्यादित नजर आ रहे थे,मगर लगता है कि बीजेपी ने अब स्वयं इन नारों को सत्य साबित करने का मन बना लिया है।स्वामी चिन्मयानंद,कुलदीप सेंगर और बृजभूषण सिंह के मामले में,बीजेपी पर पहले से ही महिलाओं के साथ उत्पीड़न करनेवालों लोगों को संरक्षण देने का आरोप है और अब इस मामले में एक और नाम जुड़ गया है दुष्यंत गौतम का। इन्हे दो दिन पहले ही सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। मगर इनको राज्यपाल बनाये जाने की घोषणा के बाद से ही,उत्तराखंड कांग्रेस राष्ट्रपति के इस निर्णय की जमकर आलोचना करने में जुट गया है और इसके खिलाफ आमरण अनशन किये जाने की भी चेतावनी जारी कर दी गई है।दरअसल दुष्यंत गौतम का नाम उत्तराखंड की उस बहुचर्चित हत्याकांड से जुड़ा है,जिसमें 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर उसके सबूत को मिटाने का प्रयास एक रिसाॅर्ट में किया गया था। अंकिता भंडारी इस रिसाॅर्ट में रिसेप्शनिष्ट के तौर पर कार्यरत थी और आरोप है कि उनको एक वीआईपी को शारिरीक रूप से संतुष्ट करने का ऑफर दिया जा रहा था,मगर इस ऑफर को ठुकरा देने के बाद, इस बात को सार्वजनिक करने की बात कह जब अंकिता भंडारी रिसाॅर्ट से जाने लगीं तो उसी समय उनकी हत्या रिसाॅर्ट में कर दी गई। इस हत्याकांड में जिस वीआईपी के नाम का जिक्र सूत्रों के हवाले से सामने आया था, वह नाम दुष्यंत गौतम का ही था। उत्तराखंड कांग्रेस का यह आरोप है कि दुष्यंत गौतम को पुलिस जांच से बचाने के लिए ही उन्हे राज्यपाल बनाकर,एक संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है।



