27000 करोड़ के अडानी प्रेम में मुख्यमंत्री बने धृतराष्ट्र

महाराष्ट्र के विधानसभा में जिस मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर को लेकर 2025 में, यह तर्क दिया था कि राज्य में सर्वसामान्य लोगों के घर में स्मार्ट मीटर नही लगाये जायेंगे,वही मुख्यमंत्री 2026 के मानसून सत्र में उसी विधानसभा में यह तर्क दे रहा है कि स्मार्ट मीटर को सभी लोगों के लिए सख्ती से अनिवार्य किया गया है और इसके अंतर्गत 27000 करोड़ की लागत से 4 करोड़ स्मार्ट मीटर, पूरे महाराष्ट्र में लगाये जायेंगे। मुख्यमंत्री फड़णवीस ने यह भी बताया कि इसमें से 1 करोड़ 23 लाख मीटर लगा भी दिये गये हैं।मुख्यमंत्री फड़णवीस स्मार्ट मीटर के बाद, अचानक से आनेवाली भारी भरकम बील को लेकर भी अडानी प्रेम में बहते हुए, यह बताने का प्रयास किया कि इस बार गर्मी बहुत ज्यादा पड़ी है,इसलिए लोगों का बीज बील ज्यादा आ रहा है। मुख्यमंत्री का यह तर्क न केवल झूठा है बल्कि स्मार्ट मीटर की कमियों का बचाव करनेवाला भी है। महाराष्ट्र में हर साल इतनी गर्मी तो जरूर पड़ती है कि जिनके घर में पंखा है वह बिना पंखे के नही रह सकते और जिनके घर में एसी है वह बिना एसी के नही रहते। उसी तरीके से जिनके घर में फ्रीज है वह बिना फ्रीज के भी नही रहते हैं,फिर बिना एसी और फ्रीज की संख्या बढ़े,ऐसा कौन सा कारण उत्पन्न हो गया कि पिछले साल के गर्मी की तुलना में,इस बार के बीज बील में लगभग दोगुने का अंतर दिखाई दे रहा है। झूठ बोलो मगर इतना जोर से बोलो कि लोगों को सत्य नजर आये,इस कहावत को सत्य सिद्ध करने में देवेन्द्र फढ़णवीस को महारथ हासिल है। जिस प्रकार से केन्द्र सरकार को अदानी प्रेम में कहीं कुछ गलत दिखाई नही देता,कुछ ऐसा ही हाल वर्तमान महाराष्ट्र सरकार का भी है। मगर केन्द्र और राज्य सरकार के इस अदानी प्रेम के कारण आमलोग किस आर्थिक कठिनाई का सामना कर रहे हैं,इससे हमारे द्वारा ही चुनी गई सरकार को कोई मतलब नही है।



