
वर्ष 2005 में यूपी के लखिमपूर खिरी में इंडियन ऑयल के एक सिनीयर पदाधिकारी मंजूनाथ की,सिर्फ इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,क्योंकी उन्होंने मिलावटी पेट्रोल और डीजल बेचने के आरोप में एक पेट्रोल पंप को सील कर दिया था। उस वक्त इस हत्याकांड की गूंज पूरे देश में सुनाई पड़ी थी। अब इसी हत्याकांड की पुनरावृति महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में हुई है,जहां इंडियन ऑयल के सेल्स मैनेजर महेश शेलके को, बड़ी ही बेरहमी से चाकू के सात वार कर मार डाला गया है और इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी भी एक पेट्रोल पंप मालिक ही है,जिसके पेट्रोल पंप को सील करने महेश शेलके उसके पेट्रोल पंप पर गये हुए थे।हिंगोली के पुलिस अधीक्षक श्रेनिक लोधा की मानें तो हिंगोली जिले के बासमत ताल्लुका के अम्बाचोंडी गांव में स्थित एक पेट्रोल पंप को सील करने के उद्देश्य से,इंडियन ऑयल के नांदेड़ कार्यालय की एक टीम उस पेट्रोल पंप पर पहुंची थी। इस पेट्रोल पंप का मालिकाना हक पंडावीर परिवार के पास है। पेट्रोल पंप के सिलींग की कार्रवाई के दौरान, इंडियन ऑयल के सेल्स मैनेजर महेश शेलके और पंडावीर परिवार के बीच थोड़ी बहस हो गई। नाराज पंडावीर परिवार के सदस्यों और उनके समर्थकों द्वारा इंडियन ऑयल की टीम पर हमला बोल दिया गया और विशेष रूप से महेश शेलके को निशाना बनाया गया। उमेश पंडावीर नामक एक 25 वर्षीय आरोपी ने, अपने पास रखे धारदार शस्त्र से महेश शेलके पर सात से ज्यादा वार किया,जिसमें महेश शेलके बुरी तरह घायल हो गये और अस्पताल पहुंचने पर उन्हे मृत घोषित कर दिया गया।महेश शेलके की हत्या का गंभीर संज्ञान लेते हुए, केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी ने न केवल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात की बल्कि अपने ट्विटर हैन्डल पर इस हत्याकांड को बेहद जघन्य बताते हुए,महाराष्ट्र सरकार से इसपर कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया। इंडियन ऑयल के चेयरमैन ए एस साहने ने भी इस हत्याकांड को बेहद गंभीर बताते हुए,महाराष्ट्र के सभी संबंधित उच्चाधिकारियों से बात की। हरदीप पूरी और ए एस साहने के इस गंभीर दखल का असर यह हुआ कि कुरून्डा पुलिस स्टेशन में दर्ज इस हत्याकांड से जुड़े, पांच आरोपियों को पुलिस ने 24 घंटे के अंदर पकड़ लिया। इनमें मुख्य आरोपी उमेश पंडावीर के साथ उसकी 46 वर्षीय मां लताबाई,21 वर्षीय श्रवण वाकुड़े,37 वर्षीय राहुल धाइजे और 27 वर्षीय प्रथमेश वाघमारे का नाम शामिल है। वैसे इस हत्याकांड ने एक बार फिर से महाराष्ट्र के कानून व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है और राष्ट्रीय स्तर पर किसी समान अपराध में,महाराष्ट्र की तुलना यूपी के अपराध से की जा रही है।



