
नवी मुम्बई के अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ, मुम्बई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गडकरी और कमलखट्टा की बेंच ने जो सख्त रूप अपनाया था,उसको कुछ ठंढ़ा करने के लिए, पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे ने सात लोगों को बलि का बकरा बनाने की तैयारी मुम्बई उच्च न्यायालय के समक्ष दिखाई है। जिन सात लोगों का नाम पालिका आयुक्त की तरफ से न्यायालय के समक्ष रखा गया है,वह सभी कहीं न कहीं घणसोली विभाग कार्यालय से जुड़े लोग हैं। जब पूरे नवी मुम्बई में अवैध ईमारतों की भरमार है,फिर एक ही विभाग कार्यालय से जुड़े लोगों पर की गई कार्रवाई को,क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के हिसाब से उचित ठहराया जा सकता है ? यही वह गंभीर सवाल है जिसके चलते पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे की इस कार्रवाई को “पीक एन्ड चूज” वाली कार्रवाई की संज्ञा दी जा रही है।
मुम्बई उच्च न्यायालय में पालिका आयुक्त के द्वारा जो प्रतिज्ञापत्र दाखिल किया गया है,उसके आंकड़े स्वयं इस बात की गवाही देते हैं कि घणसोली को छोड़कर जो बाकि के विभाग कार्यालय हैं,वहां के भी कई विभाग अधिकारी पांच पांच सालों तक एक ही पद पर बने रहे हैं और उनके समय में भी उनके कार्यक्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में अवैध बहुमंजिली ईमारतों का निर्माण हुआ है। मगर कार्रवाई सिर्फ एक विभाग कार्यालय से जुड़े लोगों पर। सबसे बड़ी बात यह कि अतिक्रमण विभाग को संभालने की प्रमुख जिम्मेदारी,अतिक्रमण उपायुक्त की होती है क्योंकी वही पालिका के सभी विभाग अधिकारियों का प्रमुख होता है और सभी विभाग अधिकारी अपने अपने क्षेत्र के अवैध निर्माण कार्यों की पूरी रिपोर्ट अतिक्रमण उपायुक्त को भेजते हैं और उनसे इस संदर्भ में उचित मार्गदर्शन की मांग करते हैं। मगर पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे को अपने उपायुक्तों में कोई कमी नही दिखाई दी। यहां तक कि जिस व्यक्ति पर अतिक्रमण विभाग से जुड़े, दो दो आपराधिक मामले दर्ज हैं और जो व्यक्ति वर्ष 2016 के बाद 7 वर्षों तक लगातार अतिक्रमण उपायुक्त बना रहा,उस अमरीश पटनीगिरे को भी पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे ने अभयदान दे दिया।
जिन सात लोगों पर कार्रवाई करने की घोषणा पालिका आयुक्त द्वारा उच्च न्यायालय में की गई है,उसमें पूर्व विभाग अधिकारी संजय तायड़े,पूर्व विभाग अधिकारी महेन्द्र सिंह ठोके और पूर्व विभाग अधिकारी शंकर खाड़े सहित सहायक अभियंता रोहित ठाकरे,सहायक अभियंता वैभव भये, पूर्व कार्यालय अधीक्षक विष्णु धनावड़े और क्लर्क प्रवीण दलवी का नाम शामिल है। यह सारे नाम घणसोली विभाग कार्यालय से जुड़े हैं और इनमें से भी ज्यादातर लोग वह हैं जो वर्ष 2022 से या उसके बाद घणसोली विभाग कार्यालय से जुड़े थे। ज्ञात हो कि वर्तमान न्यायालय अवमान याचिका के याचिकाकर्ता एडवोकेट किशोर शेट्टी ने,घणसोली विभाग कार्यालय के अंतर्गत बनी अवैध बहुमंजिली ईमारतों को लेकर 2022 में ही एक जनहित याचिका दाखिल की थी,शायद यही एक बड़ा कारण है कि पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे ने घणसोली विभाग कार्यालय से जुड़े लोगों को ही अपना निशाना बनाया है। मगर पालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे का यह निर्णय पूरी तरीके से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है,जिसमें सभी को कानूनी रूप से समान बताया गया है फिर एक विभाग के अधिकारियों को दंड और दूसरे विभाग के अधिकारियों को अभयदान कैसे दिया जा सकता है ?



