91 वर्ष के उम्र में ली आखरी सांस

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के एक छोटे से गांव अम्बाप में जब 22 अक्टूबर 1935 में डी वाय पाटिल का जन्म हुआ था,तब कोई नही जानता था कि एक छोटे से गांव में जन्मे इस सितारे को, एक दिन पूरा देश शिक्षा महर्षि के नाम से पहचानेगा और यह सितारा, महाराष्ट्र सहित पूरे देश में 22 से ज्यादा बड़े बड़े शैक्षणिक संस्थाओं का जन्मदाता बनेगा । डी वाय पाटिल को उनके इसी योगदान के लिए, भारत सरकार ने उन्हे 1991 में ही पदम श्री अवार्ड से सम्मानित कर दिया था।डी वाय पाटिल का आज दिनांक 4 अगस्त 2026 को निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन के 91 वें साल में अंतीम सांस ली। डी वाय पाटिल अपने नौजवानी काल से ही कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गये थे और और वर्ष 1957 में 22 वर्ष की उम्र में वह पहली बार कोल्हापुर नगर परिषद के सदस्य बने। वर्ष 1967 से 1978 तक वह महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में विराजमान रहे। बाद में उनका पूरा ध्यान महाराष्ट्र में शिक्षा विस्तार पर केन्द्रित हो गया और उनकी पहचान शिक्षण संस्थानों के संस्थापक के रूप में सामने आने लगी। वर्ष 2009 से वर्ष 2014 के बीच, कांग्रेस पार्टी ने उन्हे तीन राज्यों का गवर्नर बनने का अवसर भी प्रदान किया,जिसमें त्रिपुरा,बिहार और बंगाल का समावेश रहा।महाराष्ट्र में डी वाय पाटिल शिक्षण संस्थाओं को सर्वोतम शिक्षण संस्थानों में से एक माना जाता है। डी वाय पाटिल ने सामान्य शिक्षण संस्थानों से लेकर हर प्रकार के व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों की भी स्थापना की। महाराष्ट्र के इस शिक्षा महर्षि को उनके निधन पर मुम्बई तपास की भावभीनी श्रद्धांजली।



