क्या मनसे के लगातार गिर रहे ग्राफ्स से हैं चिंतीत

बाला साहब ठाकरे के जीवित रहते भर में शिवसेना छोड़कर मनसे की स्थापना करने वाले और अपने पहले ही विधानसभा की लड़ाई में, 14 विधायकों की जीत के साथ परचम लहराने वाले राज ठाकरे, इतनी जल्दी लोकप्रियता के निचले पायदान पर आ जायेंगे,इसकी कल्पना किसी ने नही की थी। अपने ओजस्वी भाषण और मराठी प्रेम के कारण राज ठाकरे,बाला साहब से अलग होने के बावजूद पूरे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे से ज्यादा लोकप्रिय और शक्तिशाली दिखाई देने लगे थे। मगर वह अपनी सफलता और लोकप्रियता को ज्यादा दिनों तक संभाल नही पाये और 10-12 सालों में ही उनकी स्थिती यह हो गई कि महाराष्ट्र विधान भवन में आज उनके एक भी सदस्य नही हैं और महानगरपालिका चुनावों में भी उनकी सफलता लगभग नगण्य हो गई है। हालांकि पिछले कुछ महीनों से राज और उद्धव एक मंच पर साथ दिखाई देनेलगे हैं,मगर उनकी संयुक्त सभा या संयुक्त मंच पर लोगों का भरोसा राज से ज्यादा उद्धव में दिखाई देता है।ऐसा लगता है कि राज ठाकरे भी अपनी गिरती लोकप्रियता से अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं और इसको लेकर बेहद चिंतीत भी हैं। शायद यही कारण है कि उनकी यह बेचैनी उनके पत्रकार परिषद में भी दिखाई दे गई। आज नाशिक में आयोजित पत्रकार परिषद के दौरान,वह न केवल अपने कार्यकर्ताओं पर गुस्सा करते दिखाई दिये बल्कि एक दो बार पत्रकार भी उनका निशाना बन गये। अपने कार्यकर्ताओं को तो उन्होंने बेहद सख्ती से पत्रकार परिषद के कक्ष से बाहर निकलवा दिया। दरअसल राज ठाकरे अपने नाशिक दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करने के लिए उपस्थित हुये थे,यह वही नाशिक है जहां मनसे का महापौर भी रह चुका है। मगर इसी नाशिक ने बेहतर काम करने के बावजूद,मनसे को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि राज ठाकरे ने नाशिक में सड़कों की दुरावस्था,कुम्भ मेले के बहाने की जा रही सरकारी तिजोरी की लूट और वर्तमान जेन जी के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे शिक्षण व्यवस्था पर भी अपनी महत्वपूर्ण राय रखी। मगर आमलोगों में और मीडिया में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि राज ठाकरे को गुस्सा क्यों आता है? और क्या वह कुछ ज्यादा ही एरोगेन्ट हो रहे हैं?



