
ऐसा लगता है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले कुछ सालों में,अपने कार्यकलापों से विरोधी पक्ष के नेताओं को इतना निराश कर दिया है कि अब उन्हे मजबूरी में सर्वोच्च न्यायालय को जगाने के लिए आन्दोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पिछले दो तीन वर्षों से चुनावी प्रक्रिया में हो रही धांधली के खिलाफ,कई राजनीतिक पार्टियों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया,मगर हर बार सर्वोच्च न्यायालय ने, चुनाव आयोग के किसी भी निर्णय पर कोई रोक न लगाते हुए सिर्फ डेट पर डेट और अनर्गल सुनवाई की प्रक्रिया जारी रखी,जिसका नतीजा यह हुआ कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गये सभी निर्णयों को अप्रत्यक्ष रूप से,न्यायिक स्विकृती मिलने लगी और चुनाव आयोग पूरी निर्भयता के साथ अपने असंवैधानिक निर्णयों को सही ठहराता रहा। मगर जब इंडियन एक्सप्रेस जैसे प्रतिष्ठित अखबार ने सबूतों के साथ चुनाव आयोग की पोल खोल दी,तब पूरे देश में लोकतंत्र को बचाने की एक आंधी चल पड़ी और अब इस आंधी का रूख सर्वोच्च न्यायालय की ओर कल मुड़ने जा रहा है।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में पूरे भारत में जिस एसआईआर को अंजाम दिया जा रहा है,उसने अबतक तेरह करोड़ मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिया है। इसमें दो से तीन करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो पिछले चुनावों में अपने मतदान का इस्तेमाल कर चुके हैं,मगर अब इनका नाम बिना इनकी सुनवाई के मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। एसआईआर की इसी गलत प्रक्रिया के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में,सैकड़ों मामले लंबित हैं,मगर सर्वोच्च न्यायालय ने न तो इस प्रक्रिया पर रोक लगाई है और न ही इस प्रक्रिया को पूरी तरह वैध करार दिया है। मगर इंडियन एक्सप्रेस की खबर के बाद देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस और इंडिया गठबंधन, इस मामले में बेहद प्रखर आन्दोलन को अंजाम देने में जुटी है। इसके अंतर्गत सबसे पहले केन्द्रीय चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया,मगर पुलिस के बेहद सख्त रूख के कारण चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन असफल रहा। मगर इस दौरान राहुल और प्रियंका दोनों को भरपूर मीडिया कवरेज हासिल हुआ। उसके दूसरे दिन राहुल और प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन द्वारा जंतर मंतर पर प्रदर्शन का निर्णय लिया गया,मगर पुलिस के सख्त रूख के कारण यह भी सफल नही हो पाया। फिर अगले दिन विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय पर राष्ट्रपति से मिला और कल सोमवार को कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का संयुक्त मोर्चा सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर पहुंचकर,मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने वाला है। राहुल गांधी ने इस मोर्चे को सफल बनाने के लिए आम नागरिकों से भी यह निवेदन किया है कि इस मोर्चे में शामिल होकर वह मतचोरी और लोकतंत्र की की जा रही हत्या के खिलाफ अपना विरोध दर्शायें।देश के कई प्रबुद्ध संगठनों और नागरिकों का यह मानना है कि स्वतंत्र संवैधानिक संस्थानों द्वारा ही, जो बिना भय के संविधान की धज्जियां उड़ाने का कार्य किया जा रहा है,उसके लिए बहुत हद तक सर्वोच्च न्यायालय भी जिम्मेदार है,क्योंकी उसने कई संवैधानिक मामलों से जुड़े मुकदमों को पिछले कई सालों से अपने यहां लटका रखा है,जिससे कुछ तानाशाही प्रवृति के सरकारी सेवकों का मनोबल बहुत बढ़ गया है और अब वह अपनी मनमानी से देश को अराजक बनाते जा रहे हैं।



