
उल्हासनगर रेलवे स्टेशन के नजदीक,विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन की हद में एक तथाकथित पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट हरीश गजवानी की निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई। हत्यारों ने रेलवे स्टेशन के समीप खड़े गजवानी पर पहले कोयता से वार किया,उसके बाद उनके सर में बेहद नजदीक से दो गोली भी मार दी। पुलिस की मानें तो इस हत्याकांड को तीन लोगों ने मिलकर अंजाम दिया है,जिन्हे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम अविनाश नायडू,विजय पूरण सिंह और नूर आलम है।हरीश गजवानी के उपर वर्ष 2021 में एक हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर थे। मगर हरीश गजवानी की एक पहचान स्वतंत्र पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट की भी थी। वह साहनी न्यूज नामक एक अखबार और यूट्यूब चैनल चलाते थे। हरीश गजवानी अपने अखबार और न्यूज चैनल में सबसे ज्यादा,जुए के अड्डों,अवैध रूप से चलने वाले लेडीज बार,स्पा पार्लर,ड्रग्स बिक्री और गुटखा माफियाओं के बारे में खबर चलाते थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैन्डल पर,अपने जान के उपर मंडरा रहे खतरे को लेकर एक विस्तृत मैसेज डाला था और इस मैसेज को, महाराष्ट्र के गृहमंत्री सहित महाराष्ट्र के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों को टैग किया गया था। इस मैसेज में कुछ पुलिस अधिकारियों का नाम लेकर,यह बताया गया था कि यह पुलिस अधिकारी, अवैध धंधों के माफियाओं के साथ मिलकर हरीश की हत्या करा सकते हैं। हरीश की पत्नी ने इस हत्याकांड की बेहद ही गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।हालांकि पुलिस इस हत्याकांड को पूरी तरीके से, हरीश के आपराधिक पृष्ठभूमि से जोड़ना चाहती है,मगर इस हत्याकांड का सबसे गंभीर पहलू यह है कि हरीश के द्वारा, अपने हत्या की आशंका को सोशल मीडिया में व्यक्त किये जाने के बाद भी उसकी हत्या कर दी गई। ऐसे में यह जरूरी है कि हरीश ने अपनी हत्या की आशंका को लेकर, जिन लोगों के नाम सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किये थे,उन सभी की जांच बेहद गंभीरता से और यांत्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करके किया जाना चाहिए।



