मरीजों को लूटने का कार्य कर रहे हैं अस्पताल

महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढ़े ने, पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र में सक्रिय, मिलावटी खाद्य पदार्थों के माफियाओं पर तो नकेल कसा ही है,अब उनकी चंगुल में आरोग्य माफिया भी फंसते दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र के सरकारी अधिकारियों में अगर किसी ने, अपनी कार्यक्षमता के आधार पर राष्ट्रीय पहचान हासिल की है, तो उस अधिकारी का नाम है तुकाराम मुंढ़े। अपने 23 साल के कार्यकाल में 26 बार तबादले का शिकार हो चुके मुंढ़े को,महाराष्ट्र सरकार का जो भी विभाग मिलता है,वह वहीं अपनी ईमानदार कार्यशैली से बेहद प्रसिद्ध हो जाते हैं।
महानगरपालिका आयुक्त के रूप में वह नवी मुम्बई और नाशिक में बेहद कम दिनों में विशाल लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब हुए थे और जब उनको महाराष्ट्र में दिव्यांग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई तो उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर, सरकारी नौकरी पानेवाले 650 लोगों के नाम का खुलासा कर दिया।
इसके बाद उन्हे वहां से हटाकर एफडीए आयुक्त का पद यह सोचकर दिया गया कि यह विभाग तो महाराष्ट्र में निष्क्रिय है,ऐसे में तुकाराम मुंढ़े कुछ महीनों तक आराम से रहेंगे। मगर तुकाराम मुंढ़े ने पिछले चार से पांच महीनों के अपने कार्यकाल में एफडीए को महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध विभाग बना दिया और अपने समर्थकों की फौज में अचानक और वृद्धि कर ली। महाराष्ट्र में मिलावट खोरी लगभग जहर के अंदाज में, हर खाद्य पदार्थों में प्रवेश कर चुकी थी,यही कारण रहा कि जब तुकाराम मुंढ़े ने लगातार इस जहरीले व्यापार पर प्रहार करना शुरू किया तो आम नागरिकों के बीच में, वह किसी बालीवुड के हीरो की तरह प्रसिद्ध होने लगे। अब उन्होंने मेडिकल माफियाओं की पोल खोलनी शुरू की है और इस कड़ी में उन्होंने जो ताजा खुलासा किया है,उसके मुताबिक मेडिकल से जुड़ी कई सामान्य सामग्रियों को, अस्पताल या दवा के दुकानदारों द्वारा, एमआरपी की अपेक्षा 10 गुनी से 20 गुनी किमत पर बेचा जा रहा है। तुकाराम मुंढ़े के अनुसार जो आईवी सेट 11 रूपये में आता है उसकी बिक्री 325 रूपये में की जा रही है। इसी प्रकार से 40 रूपये के निम्बोलाइजर को 715 रूपये में,22 रूपये के आईवी कैनुला को 424 रूपये में और 29 रूपये के कैथेटर को 310 रूपये में बेचा जा रहा है। तुकाराम मुंढ़े के इस खुलासे के बाद मेडिकल इंडस्ट्रीज में हड़कंप मच गया है,वहीं आम लोगों के बीच यह संदेश गया है कि अस्पताल और दवा दूकान की आपसी मिलीभगत से, मरीजों के साथ दिन दहाड़े लूट की जा रही है। अब देखना यह जरूरी होगा कि तुकाराम के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद,महाराष्ट्र का स्वास्थ्य विभाग इसपर क्या कदम उठाता है।



