केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अन्य प्रान्तीय भाषाओं के नेताओं को दी सलाह

नवी मुम्बई के वाशी में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन और हिन्दी दिवस 2026 में शिरकत करने आये,भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने उन नेताओं को जबरदस्त सबक प्रदान की जो अपने अपने प्रांत में,हिन्दी भाषा को अपमानित कर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करते हैं। अमित शाह ने कहा कि हिन्दी भारत की राजभाषा है और इसे अपनाये बिना, कोई भी नेता भारत में राष्ट्रीय नेता का कद हासिल नही कर सकता। उन्होंने हिन्दी को देश की एकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए,यह स्पष्ट किया कि हमारे संविधान निर्माताओं ने, देश के अलग अलग राज्यों के नागरिकों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए और एक दूसरे के बीच संवाद को और मजबूत बनाने के लिए,पूरे देश की एक राजभाषा निर्धारित की और यह राजभाषा हिन्दी के रूप में संविधान में दर्ज है।ज्ञात हो कि 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को पूरे देश की राजभाषा घोषित किया था। तब से प्रति वर्ष 14 सितम्बर के इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2019 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने 14 सितम्बर को, अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन और हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया और इसे प्रतिवर्ष देश के अलग अलग राज्यों में आयोजित करने का निश्चय किया गया। इसी कड़ी में कल नवी मुम्बई के वाशी स्थित सिडको एक्जिविशन सेन्टर में,छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन और हिन्दी दिवस 2026 का आयोजन किया गया था। देश के राजभाषा मंत्री भी होने के नाते अमित शाह स्वयं इस कार्यक्रम में भाग लेने आये थे। इस अवसर पर उनके साथ मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस,उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे,उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार,केन्द्र में राजभाषा राज्य मंत्री नित्यानंद राय और ठाणे के सांसद नरेश म्हस्के सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।इस अवसर पर अमित शाह ने अपने और नरेन्द्र मोदी जी का उदाहरण देते हुए यह बताया कि हम दोनों की मातृभाषा गुजराती है, लेकिन अगर हमें हिन्दी का अच्छा ज्ञान नही होता तो हमारी पहचान कभी भी एक राष्ट्रीय नेता की नही बन पाती। उन्होंने बताया कि हिन्दी का अच्छा ज्ञान होने के कारण,उन्हे पूरे देश में कहीं भी संगठन का कार्य करने में कोई दिक्कत नही आई और पूरे देश के नेता और कार्यकर्ता उन्हे सुनना पसंद करते हैं।



