भारत की राजभाषा में अंग्रेजी को भी बताया शामिल

अपने आपको बेहद ज्ञानी समझने वाले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने, नवी मुम्बई के वाशी में आयोजित, छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन और हिन्दी दिवस 2026 के अवसर पर,देश के गृहमंत्री सह राजभाषा मंत्री अमित शाह के सामने एक ऐसी गलत जानकारी को पेश किया,जिससे उनकी संवैधानिक ज्ञान की पोल खुल गई। देवेन्द्र फड़णवीस ने इस दौरान उपस्थित सभी लोगों को यह बताया कि 14 सितंबर 1949 को आयोजित संविधान सभा में हिन्दी सहित अंग्रेजी को भी भारत का राजभाषा घोषित किया गया था,मगर अंग्रेजी को सिर्फ 15 वर्षों के लिए राजभाषा बनाया गया था, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने 1962-63 में अंग्रेजी को फिर से भारत का राजभाषा बना दिया।जिस किसी ने भी भारतीय संविधान को थोड़ा पढ़ा होगा तो उन्हे मालूम होगा कि संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को राज्यों का एक संघ बताया गया है और अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा हिन्दी स्पष्ट तौर पर लिखी हुई है,फिर यह अंग्रेजी का ज्ञान मुख्यमंत्री फड़णवीस को कहां से आ गया मालूम नही। शायद उन्होंने इसका ज्ञान या तो किसी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से प्राप्त किया होगा या फिर मनसे यूनिवर्सिटी से। भले ही यह ज्ञान फड़णवीस ने कहीं से भी इकठ्ठी की हो,मगर देश के एक मुख्यमंत्री के द्वारा, इतने बड़े राष्ट्रीय आयोजन पर, इस तरह की गलत संवैधानिक जानकारी दिया जाना न केवल शर्मनाक है बल्कि भारतीय संविधान विरोधी ब्यान भी है।



