मामूली विवाद में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

लोगों के अंदर कानून व्यवस्था का खौफ किस तरीके से खत्म होता जा रहा है,इसका एक और उदाहरण नवी मुम्बई के नेरूल पुलिस स्टेशन की हद में दिखाई पड़ा। नेरूल पुलिस स्टेशन की हद में अपराधियों का स्वर्ग कहे जानेवाले, शिरवणे गांव में एक बार फिर अपराध का नंगा नाच दिखाई दिया। यहां एक रेस्टोरेन्ट के सामने हुए विवाद में,न केवल एक व्यक्ति की हाॅकी स्टीक से मारकर और कार से कुचलकर हत्या कर दी गई,बल्कि दो लोगों को गंभीर रूप से घायल भी कर दिया गया। व्हीआईपी नंबर प्लेट की क्रेटा गाड़ी से आये,चार आरोपियों ने इस जघन्य हत्याकांड को दिन के उजाले में अंजाम दिया और घटनास्थल से फरार होने में भी सफल रहे।ज्ञात हो कि पुलिस की वरदहस्त के कारण नेरूल का शिरवणे गांव न केवल अवैध धंधों का स्वर्ग बन चुका है,बल्कि अपराधियों के ऐशगाह का भी एक शानदार उदाहरण है। इसी शिरवणे गांव में आज सनराइज नामक एक लाॅज और रेस्टोरेन्ट के सामने,एक क्रेटा कार पर सवार होकर आये चार अपराधियों ने,सनराइज रेस्टोरेन्ट के सामने बाईक लेकर खड़े तीन युवकों के साथ,जानबूझकर पंगा लिया और बाद में,कार में रखे हाॅकी स्टीक से,इन तीनों युवकों पर बेरहमी से हल्ला बोल दिया। इस हमले में तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गये और जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद अपराधियों ने इनको दो बार कार से कुचलने का प्रयास किया,जिसमें रणजीत सिंह शेरगिल नामक एक युवक की मौत हो गई और आशुतोष मोजरकर तथा सुजल खेरकर गंभीर रूप से घायल हो गये। आरोपी जिस क्रेटा कार में सवार होकर आये थे,उस गाड़ी का नंबर है एम एच 12 यूसी 7755 ।मुम्बई तपास को सूत्रों के हवाले से जो खबर मिली है,उसके मुताबिक केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नवी मुम्बई दौरे को लेकर,वैसे तो नवी मुम्बई के सभी ऑर्केस्ट्रा बार कुछ दिनों से बंद हैं,मगर शिरवणे में स्थित सोना बार एक ऐसा बार है ,जिसपर नवी मुम्बई पुलिस का कोई भी नियम लागू नही होता और यह ऑर्केस्ट्रा बार कल रात में एक बजे शुरू हुआ और सुबह 6 बजे तक चलता रहा। इसी बार से आरोपी और पिड़ीत सभी निकले थे और बार के ही किसी मुद्दे को लेकर इनके बीच विवाद शुरू हुआ था। हालांकि इस हत्याकांड को लेकर जब मुम्बई तपास ने, नेरूल पुलिस स्टेशन से संपर्क किया तो आरोपियों की गिरफ्तारी या उनके नाम को लेकर पुलिस ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया और सिर्फ यह जानकारी दी कि जांच अभी जारी है।सवाल यह उठता है कि जब नवी मुम्बई पुलिस यह अच्छी तरह जानती है कि नेरूल का शिरवणे गांव आपराधिक गतिविधियों का खदान बनता जा रहा है और यहां के कुछ बार और लाॅज मालिक, सारे नियम कानून को आसानी से ठेंगा दिखाते रहते हैं तो फिर यहां कुछ विशेष पुलिस बन्दोबस्त का प्रयास क्यों नही किया जाता। कहीं ऐसा तो नही कि पुलिस इन आपराधिक गतिविधियों के बदले अवैध रूप से अपनी भी जेबें भरने का कार्य कर रही है।



