कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल का जबर्दस्त पोस्टमार्टम

केद्र सरकार द्वारा घरेलू उर्जा स्रोत को बढ़ावा देने और पेट्रोल तथा गैस पर आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उद्देश्य से,84 हजार करोड़ की प्रथम फेज की एक योजना को मंजूरी दी गई है और इस योजना का नाम समुद्र मंथन रखा गया है। मगर इस समुद्र मंथन योजना के शुरू होने से पहले ही, कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने इस योजना का ही पोस्टमार्टम कर दिया और तथ्यों के साथ इसका खुलासा किया कि यह स्कीम सिर्फ अदानी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लाई गई है और इस समुद्र मंथन योजना के पूरा होने पर,देश के हाथ जहर आयेगा और अदानी के हाथ अमृत।शक्ति सिंह गोहिल ने इस योजना की तुलना गुजरात के उस करप्शन माॅडल से की,जिसे नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते भर में अदानी को विशेष फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से,गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कार्पोरेशन की द्वारा अमल में लाया गया था। इस योजना के अंतर्गत गुजरात सरकार ने 27 हजार करोड़ रूपये घरेलू पेट्रोलियम तलाशने के लिए,अदानी की कंपनी पर खर्च कर दिये थे,मगर इसका नतीजा शून्य रहा और इस खर्चे को लेकर महालेखा परीक्षण की गंभीर टिप्पणी भी सामने आई थी।दरअसल समुद्र मंथन योजना के पहले चरण के लिए निर्धारित, 84,084 करोड़ रूपये का जो प्रावधान किया गया है,उसके अंतर्गत जो निजी कंपनी के पास, पेट्रोलियम पदार्थों को ढूंढ़ने के लिए समुद्री ब्लाॅक होगा,उसे केन्द्र सरकार की तरफ से कुआं खुदाई के लिए होनेवाले खर्चे का 50 प्रतिशत एडवांस में दिया जायेगा और बाकि का 50 प्रतिशत कंपनी लगायेगी। पेट्रोल या गैस का पता लगने पर केन्द्र सरकार और निजी कंपनी दोनों का 50-50 प्रतिशत शेयर उस भंडारण पर होगा। शक्ति सिंह गोहिल की मानें तो भारत में अदानी समूह एकमात्र ऐसी कंपनी है,जिसके पास पहले से ही तीन समुद्री ब्लाॅक मौजूद है और इस समुद्र मंथन का सबसे बड़ा और प्रथम फायदा उसे ही मिलने वाला है। शक्ति सिंह गोहिल ने यह भी कहा कि पेट्रोल या गैस की खोज के लिए जो कुयें खोदे जाते हैं,वह समुद्र की इतनी गहराई में होते हैं कि उसका पता कोई सामान्य आदमी या संस्था नही लगा सकती,जबकि इन कुओं को खोदे जाने का खर्च लगभग 650 करोड़ रूपये प्रति कुऑं होता है।शक्ति सिंह गोहिल ने अपने इस पत्रकार परिषद में यह भी स्पष्ट किया कि केन्द्र सरकार अपने सभी बड़े स्कैम को स्कीम में परिवर्तित कर इसे वैध ठहराने की कोशिश करती है।



