
ठाकरे बंधुओं द्वारा,केन्द्रीय चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के देशद्रोही कृत्य के खिलाफ,पुकारे गये गर्जना रैली में शिवसेना यूबीटी के उद्धव ठाकरे,मनसे के राज ठाकरे,कांग्रेस के बाला साहब थोरत,राष्ट्रवादी शरद पवार के जयंत पाटिल, जितेन्द्र आव्हाड और शेतकरी कामगार पार्टी के जयंत पाटिल सहित अनेकों नेता और हजारों की संख्या में सामान्य मतदाता शामिल हुए। यह रैली मेट्रो सिनेमा से बीएमसी मुख्यालय तक, पैदल चलकर निकाली गई और बीएमसी के नजदीक इस रैली को एक सभा के रूप में तब्दील कर दिया गया,जिसमें सभी पार्टी के नेताओं ने वर्तमान केन्द्रीय चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के असंवैधानिक कृत्यों की जमकर आलोचना की। कुछ नेताओं ने ज्ञानेश कुमार को देशद्रोही करार देते हुए,उनको जेल में डाले जाने की मांग भी कर डाली।जब बारी आई राज ठाकरे की तो उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह 2017-18 से ही,सभी राजनीतिक दलों को इस बात से आगाह करा रहे थे कि वर्तमान चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त के अवैध सहयोग से, मोदी और शाह लोकतंत्र की चोरी कर रहे हैं और इसके खिलाफ सभी पार्टियों को चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए,मगर तब किसी पार्टी ने उनकी बात पर ध्यान नही दिया। अब जब लोकतंत्र की चोरी के अनेक सबूत सामने आ रहे हैं और यह स्पष्ट हो रहा है कि महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों में लोकतंत्र की चोरी कर, बीजेपी ने अपनी सत्ता स्थापित की है,तब जाकर सारे विपक्षी दलों की निंद खुली है और वह अपने अपने ढ़ंग से विरोध प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। राज ठाकरे ने मंच पर उपस्थित सभी नेताओं से यह कहा कि अगर दिल्ली में आप चुनाव आयोग से जवाब मांगने जायें तो एसआईआर के साथ साथ ईव्हीएम को भी रद्द करने की मांग करें,क्योंकी लोकतंत्र को लूटने का एक हथियार ईव्हीएम भी है।इस दौरान उद्धव ठाकरे भी मुख्य चुनाव आयुक्त और केद्रीय चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर हमला करते दिखाई दिये। उद्धव ठाकरे की विशेषता यह रही कि उन्होंने सिर्फ चुनाव आयोग को ही,आड़ेहाथों नही लिया बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की भी,मर्यादा में रहते हुए जमकर आलोचना की और यह संकेत दिया कि चुनाव आयोग के इस देशद्रोही कृत्य में सर्वोच्च न्यायालय भी बराबर का हिस्सेदार है। इस रैली में उमड़ी भारी भीड़ इस बात को दर्शा रही थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक देशव्यापी गुस्से का निर्माण हो चला है और जल्द ही इस गुस्से की परिणति ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के रूप में सामने आ सकती है।



