अवैध कंटेनर यार्ड,गोडाउन और फैक्ट्रियां बने मुख्य कारण

नवी मुम्बई को जिस तरीके से,तेजी के साथ सिमेन्ट के जंगल में तब्दील किया जा रहा है,अब उसका असर आसपास के गांवों और निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर पड़ता दिखाई दे रहा है। पिछले छः दिनों से लगातार नवी मुंबई और आसपास के ईलाकों में भारी बारिश हो रही है। इससे नवी मुम्बई के शहरी और विकसित भागों के जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं,मगर सबसे बुरा असर उरण नगरपरिषद के कुछ गांवों और पनवेल महानगरपालिका के ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है।यहां के कुछ गांव पूरी तरीके से जलमग्न हो चुके हैं,सबसे बुरा हाल चिरनेर गांव का है,जहां करीब 100 प्रतिशत घरों में कमर तक पानी भरा हुआ है और ग्रामीणों को लाखों रूपये के व्यक्तिगत नुकसान का सामना करना पड़ा है। चिरनेर गांव के लोगों की मानें तो इस गांव के अगल बगल में,कई अवैध कंटेनर यार्ड, गोदाम और फैक्ट्रियों का निर्माण अवैध भराई करके किया गया है। जिससे बारिश के पानी का पूरा बहाव गांव के रहिवासी क्षेत्र की ओर हो गया है और इसका गंभीर खामियाजा सामान्य रहिवासियों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण इस बात से भी बेहद खफा हैं कि नवी मुम्बई में लगातार बढ़ रहे बंदरगाहों के क्षेत्रफल और नये नवेले नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल के कारण,इनके आसपास के क्षेत्रों में बिना भविष्य के खतरों का अनुमान किये,मनमाने और अवैध तरीके से बड़े बड़े कंटेनर यार्ड,गोदाम और इंडस्ट्री का निर्माण किया जा रहा है,मगर शहर की नियोजन संस्थायें अपने आंखों पर पट्टी डालकर बैठी हुई हैं।



