मगर प्रकल्पग्रस्तों की नाराजगी और बढ़ी

नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल से पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान की शुरूवात आज दिनांक 15 जुलाई से कर दी गई। यह पहली अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा नवी मुम्बई से अबुधाबी तक शुरू की गई है। इस सीधी उड़ान की खबर, वैसे तो पूरे नवी मुम्बईकरों के लिए बेहद खुशी प्रदान करनेवाली है,मगर नवी मुम्बई जिन प्रकल्पग्रस्तों की जमीन पर बसा है,उनके लिए यह खबर उनकी पीड़ा को और बढ़ानेवाली है। इन प्रकल्पग्रस्तों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि महाराष्ट्र शासन और केन्द्र सरकार के नुमाइन्दों की तरफ से, उन्हे यह आश्वासन दिया गया था कि नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल से होनेवाली पहली उड़ान के पहले नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल को उनके मसीहा दि बा पाटिल साहब का नाम दे दिया जायेगा,मगर पहली उड़ान के आज 8 महीने बीत जाने के बाद भी, प्रकल्पग्रस्तों को दिये गये इस आश्वासन को पूरा नही किया गया है।आज जब अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा के शुरू होने की खबर सामने आई तो प्रकल्पग्रस्तों ने गुस्से में आकर यह प्रतिक्रिया दी कि सरकार बाकि सब निर्णय लेने में समर्थ है,केवल दि बा पाटिल साहब का नाम दिये जाने पर उसे सुस्ती छा जाती है। कुछ प्रकल्पग्रस्तों ने सोशल मीडिया के जरिए अपने चारो स्थानीय विधायकों गणेश नाईक, मंदा म्हात्रे,प्रशांत ठाकुर और महेश वालदी को ललकारते हुये यह आवाज दी कि आप अपने जमीर को जिन्दा किजीए और अपने मसीहा के लिए खुलकर सामने आइये। ज्ञात हो कि उपरोक्त चारो विधायक नवी मुम्बई के प्रकल्पग्रस्त हैं। अब देखना यह जरूरी होगा कि नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल से, शुरू किये गये इस अंतरराष्ट्रीय उड़ान के बाद प्रकल्पग्रस्तों का आन्दोलन और तीव्र होता है या बड़े नेताओं के अभाव में, पहले की तरह दि बा पाटिल के नामकरण का मुद्दा एक बार फिर ठंढ़े बस्ते में चला जाता है।



