स्कूल के अंदर और अगल बगल में किया पूरी तरह प्रतिबंधित

बच्चों के अंदर फैट या सुगर बढ़ाने वाले सभी खाद्य पदार्थों के खिलाफ,महाराष्ट्र के अन्न और औषध आयुक्त तुकाराम मुंढ़े ने अपने पैलेट गन का इस्तेमाल करते हुए,उन्हे किसी भी विधालय के अंदर या विधालय की परिधी के 50 मीटर के अंदर बेचे जाने या मुफ्त में बांटे जाने पर भी रोक लगा दी है। तुकाराम मुंढ़े ने अपने इस निर्णय को बच्चों के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद ही अहम बताया।तुकाराम मुंढ़े को जब से महाराष्ट्र का अन्न और औषध आयुक्त बनाया गया है,तब से यह विभाग महाराष्ट्र का सबसे चर्चित विभाग बन गया है। जिस अन्न और औषध विभाग को महाराष्ट्र के सुषुप्त विभागों में से एक माना जाता था,तुकाराम मुंढ़े ने उस विभाग को इतना चर्चित बना दिया कि कई बार इस विभाग की गूंज महाराष्ट्र के विधानसभा सहित देश के सभी प्रमुख चैनलों पर सुनाई पड़ने लगी। जिस डेयरी सम्राटों और प्रसिद्ध होटलों के खिलाफ, अनियमितता या मिलावट को लेकर,अबतक किसी अन्न और औषध आयुक्त ने कार्रवाई करने की हिम्मत नही दिखाई थी,तुकाराम मुंढ़े के पैलेट गन से वह भी नही बच पाये। इसके अलावे फर्जी विज्ञापन,मिलावटी मिठाई, मिलावटी बेकरी,जहरीले रसायन से पकाये जानेवाले फल,गुटखा,पान मसाला और मिलावटी खाद्य तेल और घी कोई ऐसा क्षेत्र नही बचा जहां तुकाराम मुंढ़े का पैलेट गन न चला हो और इससे कोई न कोई घायल न हुआ हो।तुकाराम मुंढ़े के तेजी से बढ़ रहे पैलेट गन के प्रभाव को रोकने के लिए, कुछ राजनेताओं ने उन्हे प्रसिद्धी का भूखा बताने की कोशिश भी की,मगर तुकाराम एकलव्य के लक्ष्य की तरह बिना किसी की परवाह किये,अपने पैलेट गन रूपी निर्णय का इस्तेमाल करते रहे। उनका यह दृढ़ निश्चय ही, उनको महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित करने में सहायक साबित हुआ है।



