शहरी विकास मंत्रालय नही छोड़े तो फड़णवीस करा सकते हैं कोई बड़ा खेला

महाराष्ट्र के वर्तमान उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे ने,एक बार राजनीतिक दबाव बनाकर भले ही देवेन्द्र फड़णवीस के हाथ से मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छिन ली हो और आज भी देवेन्द्र फड़णवीस के सबसे पसंदीदा विभाग,शहरी विकास मंत्रालय पर अपना कब्जा बरकरार रखे हों,मगर फड़णवीस तो फड़णवीस हैं,अपने अपमान का बदला समय पर लेना जानते हैं। इसलिए जब कहीं से बात नही बनी तो अब सर्वोच्च न्यायालय के दबाव का इस्तेमाल किया जा सकता है।दरअसल शिवसेना के विभाजन मामले में एक बात तो स्पष्ट है कि यह विभाजन संवैधानिक रूप से अनुचित था और इसको अभी तक मान्यता सिर्फ बीजेपी के आशिर्वाद के भरोसे हासिल है। मगर एकनाथ शिन्दे इसके बावजूद अपनी अकड़ को थोड़ा बरकरार रखे हुए हैं और शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार बीजेपी को देने को तैयार नही हैं। इसलिए अब बीजेपी सर्वोच्च न्यायालय के बहाने उनके उपर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बना रही है और सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले में डे टु डे बेसिस पर सुनवाई करने में लगा है। अब यही मौका है कि बीजेपी अपने प्रभुत्व का धाक दिखाकर,एकनाथ शिन्दे को झुका सकती है या फिर सर्वोच्च न्यायालय के सहारे उनके अस्तित्व को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आज भी इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई और कल भी इसकी सुनवाई निर्धारित है। इस सुनवाई से एकनाथ शिन्दे खेमे में बेचैनी काफी बढ़ गई है। लेकिन जैसा कि एक कहावत है कि “बोया पेड़ बबुल का तो आम कहां से होये”, आज यह कहावत एकनाथ शिन्दे पर पूरी तरीके से फिट बैठती नजर आ रही है।



