भारी बारिश के बीच बनाई जा रही है सड़कें

खराब सड़कों और गटरों को लेकर,नवी मुम्बई महानगरपालिका और पनवेल महानगरपालिका को तो, कई बार गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों से गुजरना पड़ता है,मगर ‘वी मेक सिटी’ का नारा देनेवाली सिडको,बड़ी चालाकी से अपने भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने में कामयाब हो जाती है। ऐसा ही एक उदाहरण नये रूप से विकसित हो रहे और नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल के कारण,बेहद कम समय में प्रसिद्ध हो चुके उलवे में दिखाई दे रहा है। जहां अगर पिछले पांच साल की सड़कों का रिकॉर्ड निकाल लिया जाये,तो कई सड़क ऐसे मिलेंगे जिनपर, एक ही वर्ष में तीन तीन,चार चार बार काम किये जाने के सबूत मिलेंगे। और ऐसा हो भी क्यों न,जब भरी बारिश में सड़कों का निर्माण कार्य किया जायेगा,तो वह सड़कें कितने दिनों तक चल पायेंगी।बेलापूर उरण रोड से बामनडोंगरी रेलवे स्टेशन तक के रोड के सिमेन्टीकरण के कार्य को,बारिश शुरू होने के कुछ दिन पहले ही शुरू किया गया था। जबकि सभी प्लानिंग बाॅडी के लिए महाराष्ट्र में नियम यह है कि प्रत्येक वर्ष 31 मई के बाद किसी सड़क या गटर की खुदाई या उसके निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाती है। मगर यह तो सिडको है साहब,नियम कानून तोड़कर बड़े से बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देना इसकी आदत बन चुकी है। शहरी विकास मंत्रालय का इस संस्था पर विशेष प्रेम होने के कारण, सिडको और धड़ल्ले से बिना डर भय के भ्रष्टाचार को अंजाम देते रहती है,वरना तेज बारिश में भी जिस तरीके से बेलापूर उरण रोड और बामनडोंगरी स्टेशन के बीच का, सड़क निर्माण आसानी से चल रहा है,उसपर अबतक कितनी आवाजें उठ गई होतीं। इस इलाके में जितने भी स्थानीय नेता हैं,उनकी ही कंपनी को यहां सबसे ज्यादा ठेका मिलता है, इसलिए वह तो इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठायेंगे नही और रही पत्रकारों की बात, तो वह पता नही सिडको पर इतनी मेहरबानी क्यों बरसाते हैं। वैसे उलवे में सेक्टर 24,25,26,23,17,18 और 19 के सड़कों की हालत इतनी खराब है कि नई चार पहिया वाहनों के सस्पेंशन खराब हो जा रहे हैं और दो चाकी वाहनों के शाॅक ऑब्जर्वर जवाब दे दे रहे हैं।मगर मजाल है कि सिडको का दक्षता विभाग और ऑडिट विभाग इन भ्रष्टाचारों पर उँगली उठा दे,उनके विभाग के लिए भी सिडको का अभियांत्रिकी विभाग अपना दिल बड़ा किये घूमता रहता है।



