मनसे ने भी दी चुनौती

महाराष्ट्र में आजकल राजनीतिक और सामाजिक विवादों का एक तूफान चल पड़ा है,जिससे राष्ट्रिय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र की छवि बेहद प्रभावित हो रही है। पहले हिन्दु-मुस्लिम,फिर मराठी-गैर मराठी,फिर मराठा विरूद्ध ओबीसी,फिर उबाटा विरूद्ध शिन्दे सेना और अब बीजेपी विरूद्ध मनसे,पिछले कुछ महीनों में ऐसे विवादों की बाढ़ सी आ गई है। हालिया तनाव मनसे के युवा नेता,अमित ठाकरे द्वारा की गई एक अशोभनीय हरकत के कारण पैदा हुआ है।दरअसल अमित ठाकरे,महाराष्ट्र नवनिर्माण विधार्थी सेना द्वारा आयोजित छात्रों के एक कार्यक्रम में भाग लेने पुणे गये हुए थे। यहां उन्हे यह जानकारी दी गई कि पुणे में स्थित गवर्नमेंट पाॅलिटेकनीक काॅलेज में छात्रों के होस्टल में साफ सफाई और मेस की अवस्था बेहद दयनीय है। यह जानकारी मिलने पर अमित ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण विधार्थी सेना के करीब 25 से 30 सदस्य इस विषय पर प्रिंसीपल से जवाब मांगने,काॅलेज के प्रशासकीय ईमारत में घुस गये और प्रिंसीपल के केबिन में हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान प्रिंसीपल के केबिन में, भारत की कई महान विभूतियों के तस्वीरों बिल्कुल बीच में अमित ठाकरे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर दिख गई। इसपर अमित ठाकरे ने प्रिंसीपल राजेन्द्र पाटील को मोदी की तस्वीर को तुरंत निचे उतारने का निर्देश दिया। मगर प्रिंसीपल के इंकार करने पर अमित ठाकरे के सहयोगियों ने अपमानजनक तरीके से मोदी की तस्वीर को जबरदस्ती निचे उतार दिया। इस दौरान अमित ठाकरे और उनके सहयोगियों द्वारा प्रिंसीपल को धमकाने का भी प्रयास किया गया।अमित ठाकरे और उनके सहयोगियों के इस कृत्य के खिलाफ,प्रिंसीपल राजेन्द्र पाटील ने कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत पुणे के सप्तश्रृंगी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराया है और पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर को जबरदस्ती उतारे जाने से,महाराष्ट्र बीजेपी के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त गुस्सा है और उन्होंने इसके खिलाफ,पुणे में मनसे कार्यालय के सामने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बीजेपी और मनसे के कार्यकर्ता आपस में भिड़ने को तैयार हो गये। मुम्बई में भी बीजेपी द्वारा प्रदर्शन किये जाने की बात सुनकर,मनसे के कार्यकर्ता भी अपने ऑफिस में इकठ्ठे होने लगे और उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को खुली चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह मनसे के कार्यालय के सामने पहुंचकर दिखायें।भले ही राजनीतिक पार्टियां इस तरह की स्टंटबाजी से,अपना राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करती हों,मगर इसका गंभीर खामियाजा महाराष्ट्र के आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।



