‘डीसीपी हाजिर हो’ का मुम्बई उच्च न्यायालय का फरमान

नवी मुम्बई में किये गये अवैध ईमारतों के निर्माण का मुद्दा,दिनोंदिन गरमाता ही जा रहा है। अब मुम्बई उच्च न्यायालय के निशाने पर रबाले पुलिस स्टेशन दिखाई दे रहा है। कल होनेवाली सुनवाई के लिए, मुम्बई उच्च न्यायालय ने संबंधित डीसीपी हाजिर हो का फरमान जारी कर दिया है। दरअसल न्यायालय का गुस्सा तब आसमान चढ़ गया,जब न्यायालय में नवी मुम्बई महानगरपालिका ने यह खुलासा किया कि पुलिस की मौजूदगी में उसके अधिकारियों और कर्मचारियों पर भीड़तंत्र के द्वारा हमला किया गया,मगर पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इतना ही नही पालिका अधिकारियों द्वारा नामजद एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद,पुलिस ने किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की । नवी मुम्बई महानगरपालिका के वकील ने न्यायालय को यह भी बताया कि पालिका की एक गर्भवती महिला विभाग अधिकारी के साथ किये दुर्व्यवहार के कारण,घबराहट से उसका गर्भपात हो गया और वह अभी भी सदमे में है।पालिका के वकील द्वारा इन बातों को बताये जाने के बाद न्यायमूर्ति गडकरी और न्यायमूर्ती कमलखट्टा का पारा अचानक से काफी बढ़ गया और उन्होंने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि क्या सरकार पालिका के अधिकारियों की हत्या कराना चाहती है। राज्य सरकार के वकील ने न्यायालय को बताया कि उन्हे इस तरह के घटना की कोई जानकारी नही है। इसके बाद न्यायालय ने पालिका के वकील को सारे वीडियो राज्य सरकार के वकील को देने का निर्देश दिया और राज्य सरकार को यह निर्देशित किया कि वह कल तक इस मामले में एक विस्तृत प्रतिज्ञापत्र न्यायालय को सादर करे। न्यायालय के गुस्से का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि न्यायालय ने कल शाम 3 बजे इसकी सुनवाई भी रखी है और नवी मुम्बई के संबंधित पुलिस उपायुक्त को न्यायालय में हाजिर रहने का फरमान भी जारी कर दिया है। मुम्बई तपास ने दो दिन पहले ही यह खबर प्रकाशित की थी कि रबाले पुलिस स्टेशन और भू माफियाओं के बीच जबरदस्त सांठगांठ है और इसके कई सबूत मुम्बई तपास के पास मौजूद हैं। अब तो पालिका प्रशासन ने ही रबाले पुलिस स्टेशन की पोल खोल दी है,ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि माननीय पुलिस आयुक्त मिलींद भारंबे अपने भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।शायद पाठकों में से बहुत लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि मुम्बई उच्च न्यायालय,वकील किशोर शेट्टी की एक न्यायालय अबमान याचिका को पीछले कुछ दिनों से काफी गंभीरता से सुन रहा है और इस संदर्भ में कई कड़े निर्देश अबतक न्यायालय जारी कर चुका है और इसी कड़ी में अबकी बार पुलिस प्रशासन न्यायालय की गिरफ्त में फंसता दिखाई दे रहा है।



