अभी तक किसी की गिरफ्तारी न होने से संदेह गहराया

मुम्बई तपास न्यूज पोर्टल द्वारा,जिस फर्जी कोर्ट ऑर्डर की खबर को सबसे पहले प्रसारित किया गया था,उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में पुलिस की जांच बेहद सुस्त गति से होती दिखाई दे रही है। पुलिस ने इस संदर्भ में 20/06/2026 को ही एफआईआर दर्ज कर लिया था,मगर फिर भी अभी तक इसमें किसी की भी गिरफ्तारी संभव नही हो पाए है। इसकी जानकारी मुम्बई तपास को स्वयं बेलापूर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अरूण पवार ने मुम्बई तपास को दी।ज्ञात हो कि इस फर्जी कोर्ट ऑर्डर का खुलासा,नवी मुम्बई महानगरपालिका के वर्तमान सभागृह नेता सागर नाईक के एक व्हाट्सएप मैसेज से हुआ था, जिसे उन्होंने नवी मुम्बई महानगरपालिका आयुक्त कैलाश शिन्दे को भेजा था। इस व्हाट्सएप मैसेज में उन्होंने नवी मुम्बई के एक अवैध बहुमंजिली ईमारत को दिये गये,तोड़क कार्रवाई की नोटिस पर कोर्ट का स्टे होने की बात कह पालिका आयुक्त से इस ईमारत पर कोर्ट के फाइनल ऑर्डर तक कोई कार्रवाई न किये जाने का निवेदन किया था और इस स्टे ऑर्डर की प्रत भी पालिका आयुक्त को भेजी थी।मगर पालिका आयुक्त ने जब इस स्टे ऑर्डर की अपने विधी विभाग से जांच की,तो यह ऑर्डर फर्जी होने का खुलासा हुआ। इसके बाद पालिका प्रशासन ने संबंधित न्यायालय को इसकी जानकारी दी और न्यायालय ने इस मामले को अति गंभीर मानते हुये,स्वतः संज्ञान लेते हुए बेलापूर पुलिस स्टेशन को तुरंत एफआईआर दर्ज कर इसकी गहराई से जांच के आदेश दिये। इसके बाद 20 जून 2026 को बेलापूर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हो गया। मगर आज 20 दिन गुजर जाने के बाद भी इस मामले में किसी को गिरफ्तार नही किया गया है। हालांकि संबंधित ईमारत को पालिका और सिडको ने मिलकर जमिन्दोस्त कर दिया है,मगर यह सवाल अब भी बरकरार है कि इस ईमारत को लेकर तैयार किये गये कोर्ट के फर्जी स्टे ऑर्डर का निर्माता कौन है और इस ईमारत के मुख्य विकासक का इस फर्जी कोर्ट ऑर्डर के निर्माण में कितना बड़ा योगदान है। वैसे भी पिछले कुछ दिनों से मुम्बई उच्च न्यायालय ने,नवी मुम्बई के अवैध बहुमंजिली ईमारतों के खिलाफ काफी सख्त रूप अपना रखा है,अब देखना यह है कि एफआईआर का आदेश देनेवाले न्यायाधीश,पुलिस के इस ढ़ीलेढ़ाले रवैये पर क्या रूख अपनाते हैं।



