आरएसएस की खुले मंच से वर्दी में की थी प्रशंसा

नागपूर के नये पुलिस आयुक्त विश्वास नागरे पाटील अपने पदभार ग्रहण के साथ ही एक बड़े विवाद में फंस गये हैं। उन्होंने आरएसएस द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में न केवल भाग लिया बल्कि इस कार्यक्रम के मंच से उन्होंने वर्दी में आरएसएस की जमकर तारीफ भी की। आरएसएस को बीजेपी का पैतृक संगठन माना जाता है और यह संगठन भारत की धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का भी विरोधी है। ऐसे में एक पुलिस ऑफिसर द्वारा वर्दी में इस संगठन के कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से भाग लेना और खुले मंच से इस संगठन की तारीफ करना,यह भारत सरकार द्वारा किसी भी सरकारी अधिकारी के लिए निर्धारित मानदंडों का पूरी तरीके से उल्लंघन है।यही कारण है कि राज ठाकरे सहित विपक्ष के कई नेताओं ने इस विषय पर विश्वास नागरे पाटील को आड़े हाथों लेते हुए उनकी कड़ी आलोचना की है और यह सलाह भी दी है कि वह भारतीय पुलिस सेवा से तुरंत त्यागपत्र दें और आरएसएस या बीजेपी की सदस्यता स्विकार कर लें। भारतीय सरकारी सेवा अधिनियम के मुताबिक किसी भी सरकारी अधिकारी को अपने कर्तव्य पालन के दौरान न केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। इसलिए उन्हे किसी भी राजनीतिक या धार्मिक कार्यक्रम के सार्वजनिक मंच पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की मनाही है।मगर विश्वास नागरे पाटील ने न केवल आरएसएस के कार्यक्रम में मंच साझा किया बल्कि आरएसएस की जमकर तारीफ भी की। उसके बाद विपक्षी उनकी निष्पक्षता पर आशंका जताते हुए,यह तर्क दे रहे हैं कि अगर बीजेपी या आरएसएस के साथ किसी अन्य राजनीतिक पार्टी का कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वैसे समय में नागपूर के नये पुलिस आयुक्त से निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को मुम्बई उच्च न्यायालय की दहलीज पर भी ले जाने की कोशिश में जुटे हैं।



