
दिल्ली में एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ भाजपा समर्थित कुछ गुन्डों के द्वारा,मारपीट और छेड़खानी किये जाने का विडियो सामने आने के बाद, पूरे देश से इसको लेकर विरोधी प्रतिक्रियायें सामने आ रही हैं। इसकी सबसे ज्यादा गर्मी मुम्बई में दिखाई दी,जहां पूरे ठाकरे परिवार ने मिलकर एक ऐसे आक्रमक आन्दोलन को जन्म दिया कि इससे न केवल पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गये बल्कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया। आदित्य ठाकरे ने तो यह एलान कर दिया है कि जबतक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नही हो जाता और मतदान चोरी की यह प्रक्रिया पूरी तरह बंद नही होती,तबतक शिवसेना यूबीटी लगातार इस आन्दोलन को जारी रखेगी।दरअसल कल दिल्ली में जंतर मंतर पर सीजेपी द्वारा बुलाये गये आन्दोलन के दौरान,बीजेपी समर्थित कुछ गुन्डों द्वारा,जिस तरीके से महिला और पुरूष प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिये जाने का विडियो सामने आया और पुलिस की बर्बरता और जबरदस्ती के भी दृश्य सामने आये,उसको लेकर शिवसेना यूबीटी मुम्बई की सड़कों पर निषेध आन्दोलन करने शिवसेना भवन से निकली थी,जिसका नेतृत्व आदित्य और तेजस ठाकरे स्वयं कर रहे थे। मगर जब मुम्बई पुलिस द्वारा जोर जबरदस्ती से इस आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया गया तो आदित्य और तेजस ठाकरे सीधे मुम्बई पुलिस से भीड़ गये और मुम्बई पुलिस के साथ उनकी तीखी नोंकझोंक हुई। इस बात की खबर जैसे ही राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे को लगी तो वह भी अपने समर्थकों के साथ मुम्बई पुलिस से दो दो हाथ करने सड़कों पर निकल पड़े। बाद में पूरा ठाकरे परिवार अपने दल बल के साथ शिवाजी पार्क के उस पुलिस स्टेशन में पहुंच गया,जहां शिवसेना यूबीटी के कुछ आन्दोलनकारियों को हिरासत में रखा गया था। इस दौरान शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के आगे का नजारा किसी बड़े आन्दोलन की तरह दिखाई पड़ने लगा। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे की तरफ से इस बात का भी एलान किया गया कि देश के गद्दार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक मुम्बई में यह आन्दोलन लगातार जारी रहेगा।ऐसा लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए बीजेपी, जो जोर जबरदस्ती की आजमाइश कर रही है,लोगों का गुस्सा उतना ही बढ़ता जा रहा है और देश में बीजेपी की छवि दिनोंदिन गर्त में जाती दिखाई दे रही है। जो लोग कलतक वोट चोरी के इल्जाम को स्विकार करते नजर नही आ रहे थे,अब वह भी यह मानने को मजबूर हो गये हैं कि कुछ तो गड़बड़ है,वरना बीजेपी या मोदी ज्ञानेश के लिए,अपनी इज्जत दांव पर क्यों लगा रहे हैं।



