सैकड़ों परिवारों के बेघर होने की आशंका बढ़ी

नवी मुम्बई में अवैध बहुमंजिली ईमारतों के निर्माण का मुद्दा अब बेहद गंभीर स्थिती में पहुंच चुका है। सिडको ने मुम्बई उच्च न्यायालय के सख्त रूख को देखते हुए,अपना पाप छुपाने के लिए, अब उन अवैध ईमारतों के उपर अंतीम कार्रवाई करने की पहल शुरू कर दी है,जिनके निर्माण में सिडको के संबंधित भ्रष्ट अधिकारियों का योगदान सबसे ज्यादा रहा है।आज स्थिती यह है कि अकेले घणसोली नोड में,सिडको ने लगभग 30 अवैध बहुमंजिली ईमारतों की सुनवाई पूरी कर,इनको अपने अंतीम आदेश में पूरी तरह अवैध ठहरा दिया है और यह भी स्पष्ट किया है कि यह सभी ईमारतें सिडको के लिए संपादित भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई गई हैं। इन सभी ईमारतों को तोड़ने से पहले, इन ईमारतों के पानी और बिजली कनेक्शन कट करने के लिए,सिडको की तरफ से नवी मुम्बई महानगरपालिका और संबंधित विद्युत विभाग कार्यालय को पत्र लिखा गया है।पालिका और विद्युत विभाग ने इस कार्य को पूरा करने के लिए रबाले पुलिस स्टेशन से पर्याप्त सुरक्षा बल की मांग की है। सिडको ने प्राथमिक स्तर पर जिन 30 ईमारतों को अपना निशाना बनाया है,उनमें से 9 ईमारतों की सूची मुम्बई तपास को हाथ लगी है,जिनके नाम इस प्रकार से हैं:- 1) मल्हार हाईट्स,तलवली जी+52) गणेश दर्शन अपार्टमेंट,तलवली,जी+53) विष्णु अपार्टमेंट,तलवली,जी+44) साई एकविरा अपार्टमेंट,तलवली,जी+55) गौरी अपार्टमेंट,तलवली,जी+46) पवित्रा अपार्टमेंट,तलवली,जी+57) शिवकृपा अपार्टमेंट,तलवली,जी+58) विष्णु गंगा अपार्टमेंट,तलवली,जी+59) विष्णु हाईट्स ए वींग और बी वींग,तलवली,जी+5एक अनुमान के मुताबिक अगर सिडको ने,सुनवाई पूरी हो चुकी सभी 30 ईमारतों पर तोड़क कार्रवाई की,तो कम से कम 1000 लोग बेघर हो जायेंगे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि महाराष्ट्र सरकार ने,स्थानीय राजनेताओं के दबाव में,जो अवैध ईमारतों को रेगुलराइज करने का शासन निर्णय सार्वजनिक किया था,क्या वह मात्र एक छलावा था और क्या इसका इस्तेमाल सिर्फ मतदान पाने के लिए किया गया था ? अगर नही तो फिर महाराष्ट्र शासन इस मसले पर अपनी स्पष्ट भूमिका न्यायालय,सिडको,पालिका और एमआईडीसी के सामने क्यों नही रखती,जिससे सभी को समय रहते न्याय मिल सके।



