बाल बाल बचे लोग

कोपरखैरणे सेक्टर 18 के भूखंड क्रमांक 14 पर स्थित अथर्व सोसायटी के रूम नंबर 302 का स्लैब गिरकर रूम नंबर 202 में पहुंच गया। यह तो भगवान का शुक्र रहा कि उस वक्त दोनो ही रूम में कोई व्यक्ति मौजूद नही था,वरना किसी की जान को भी धोखा हो सकता था।सबसे बड़ी बात यह है कि इस ईमारत के रूम नंबर 302 का पूरा स्लैब ही निचे आ गिरा,जिसके बाद इस ईमारत को अति खतरनाक मानते हुए,यहां के सभी रहिवासियों को सेक्टर 5 में स्थित पालिका के समाज मंदिर में शिफ्ट किया गया है। जैसे जैसे नवी मुम्बई की ईमारतें पुरानी होती जा रही हैं,वैसे वैसे इनमें से ज्यादातर ईमारतों के घटिया निर्माण कार्य की पोल लगातार खुल रही है। इस घटिया निर्माण के मामले में,नवी मुम्बई का निर्माण करनेवाली सरकारी संस्था सिडको सबसे आगे नजर आती है। जिस सिडको ने अपनी बनाई ईमारतों को सामान्य लोगों को साठ साल के लीज पर दिया है, वह ईमारतें 15-20 सालों में ही दम तोड़ने लगी थीं,इनमें से कई ईमारतों को तो खतरनाक घोषित करके,उनके पुनर्विकास के लिए उनको जमींदोज भी कर दिया गया है। कोपरखैरणे और बेलापूर को मिलाकर इस बारिश में अबतक तीन ईमारतों का स्लैब गिर चुका है और इन ईमारतों को अति खतरनाक मानते हुए उन्हे खाली ही करा लिया गया है।



