मुम्बई तपास के पास दक्षता विभाग में दर्ज कराये गये कई गंभीर शिकायतों की सूची

नवी मुम्बई पुलिस आयुक्तालय की हद में,सात सालों से भी ज्यादा समय तक,विभिन्न पुलिस उपायुक्तों की जिम्मेदारी संभालने वाले सुरेश मेंगड़े,जब सिडको में लगभग चार साल पहले मुख्य दक्षता अधिकारी के पद पर नियुक्त हुये,तो उनके अबतक के कार्यकाल में सिडको प्रशासन से जुड़े, कई गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायतें विभिन्न प्रकार के लोगों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा दर्ज कराई गईं, मगर एक शिकायत पर भी कोई ऐसी जांच सामने नही आई,जिससे लगे कि सिडको में दक्षता विभाग अपनी जिम्मेदारी को निभा रही है। कई गंभीर शिकायतों को बिना उचित जांच प्रक्रिया को पूरा किये बंद कर दिया गया है और इसकी सूचना तक शिकायतकर्ता को नही दी गई है।सिडको में जब पहली बार दक्षता विभाग की स्थापना की गई थी और प्रज्ञा सरवदे मुख्य दक्षता अधिकारी बनाई गई थीं,उस समय के प्रत्येक वार्षिक दक्षता रिपोर्ट में जो गंभीर शिकायतें हुआ करती थीं,उसका पूरा विवरण और उसपर दक्षता जांच की पूरी रिपोर्ट शामिल हुआ करती थी। मगर बाद में वार्षिक दक्षता रिपोर्ट में सिर्फ कुल शिकायतों की विभाग निहाय संख्या और उनमें से बिना कार्रवाई के बंद कर दी गई संख्या का विवरण होता है। साथ ही जिन शिकायतों की जांच पेन्डिंग है उनकी संख्या दी रहती है। इस रिपोर्ट में ज्यादा से ज्यादा,वह तस्वीर या खबर शामिल रहती है जो दक्षता सप्ताह से या भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से जुड़ी रहती है। इन रिपोर्टों में इस बात की भी जानकारी नही रहती कि दक्षता विभाग की तरफ से कितने भ्रष्टाचार या अनियमितताओं के खिलाफ, सिडको प्रशासन की तरफ से एफआईआर दर्ज कराया गया है। जब वार्षिक दक्षता रिपोर्ट को ही इतना कमजोर कर दिया गया हो तो फिर इस कमजोरी का फायदा उठाने से सुरेश मेंगड़े जैसे पुलिस अधिकारी भला कैसे चूक सकते थे।सुरेश मेंगड़े ने दक्षता अधिकारी रहते हुए,सिडको के सीयूसी विभाग के प्रमुख पद की जिम्मेदारी को भी अपने खाते में ले आये। सुरेश मेंगड़े जब से सीयूसी के प्रमुख बने, तब से अतिक्रमण और अवैध निर्माण को संरक्षण देने की सिडको में जो रिश्वत राशि थी,उसमें अचानक से तीन गुनी या चार गुनी की वृद्धि हो गई। इसके अलावे सिडको के भूखंड घोटालों और इन घोटालों से जुड़े पूरे फर्जीवाड़े की पुख्ता खबर और सबूत, सिडको के दक्षता विभाग को दिये जाने के बावजूद,सुरेश मेंगड़े की तरफ से शिकायतकर्ताओं को कोई भी लिखित या मौखिक जानकारी नही दी जाती और बिना शिकियतकर्ता की सुनवाई के शिकायत को दफ्तरी दाखिल कर दिया जाता है या यूं कहें कि बंद कर दिया जाता है। जो शिकायतकर्ता आर्थिक और कानूनी रूप से इतना सक्षम हैं कि वह अपनी लड़ाई कोर्ट तक ले जा सकते हैं तो ऐसे मामलों में मेंगड़े वादी और प्रतिवादी के बीच समझौता कराने का भी कार्य करते हैं। सिडको में करीब 150 ऐसे भूखंड हैं जिनका आवंटन सिडको द्वारा कभी नही किया गया,मगर इन भूखंडों के जाली आवंटन पत्र, जाली सिडको करारनामे और जाली त्रयस्थ पक्ष करारनामे के आधार पर इन भूखंडों का कब्जा किन्ही और लोगों के पास है,मगर इस पूरी रिपोर्ट पर सुरेश मेंगड़े कुंडली मारकर बैठे हैं और इसे सार्वजनिक नही होने दे रहे। इनमें से लगभग दस भूख़डों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया था जो पिछले दस सालों से न्यायालयों में पेन्डिंग है,मगर इसकी जल्द सुनवाई और फैसले के लिए दक्षता विभाग बिल्कुल सक्रिय नही है।अब तो सुरेश मेंगड़े का एक और नया खेल सामने आया है,जिसमें उनके सीयूसी विभाग द्वारा, नवी मुम्बई महानगरपालिका और महाराष्ट्र राज्य विधुत वितरण कंपनी को कुछ अवैध ईमारतों की सूची देकर उनके पानी और बिजली कनेक्शन को कट करने का निर्देश,मुम्बई उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर दिया जाता है और बाद में इसको लेकर सेटिंग गेटिंग का खेल शुरू कर दिया जाता है। पहला खेल इस सूची में नाम न शामिल करने को लेकर किया जाता है और दूसरा खेल इस सूची को आगे फाॅलो न करने के नाम पर।ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सिडको के मुख्य दक्षता अधिकारी सुरेश मेंगड़े, अपने पुलिसिया अनुभव का लाभ अवैध वसूली में ले रहे हैं साथ ही सवाल यह भी उठता है कि सिडको के मुख्य दक्षता अधिकारी के कार्यों का मूल्यांकन किसी और संस्था या अधिकारी द्वारा किया जाता है या नही,अगर इसका उत्तर हां है तो फिर उस संस्था और अधिकारी की नजर से सुरेश मेंगड़े कैसे बच निकलते हैं ?



