
इस देश के पवित्र लोकतंत्र को कितनी गहरी नजर लगी है और चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं की हालत,वर्तमान सरकार ने क्या कर दी है,इसकी एक झलक आज दिल्ली के जंतर मंतर से मुम्बई के शिवाजी पार्क तक दिखाई दी । वर्तमान केन्द्र सरकार के संरक्षण में चुनाव आयोग द्वारा,पिछले कुछ वर्षों में जिस तरीके से लोकतंत्र की रक्षा में सेंध लगाया गया और जिस तरीके से अनेक असंवैधानिक कृत्यों को अंजाम दिया गया,उससे पूरे देश के मतदाताओं में मुख्य चुनाव आयुक्त और वर्तमान चुनाव आयोग के खिलाफ एक भयंकर नाराजगी है,जिसकी एक झलक दिल्ली के जंतर मंतर और मुम्बई के शिवाजी पार्क में दिखाई दी।दिल्ली के जंतर मंतर पर,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके कृत्यों के जांच की मांग को लेकर सिवील सोसायटी और आइसा से जुड़े लोगों के द्वारा प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन को कई राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन हासिल हुआ। मगर पुलिस द्वारा पुरे जंतर मंतर के इलाके में कर्फ्यू लगा दिये जाने के कारण और प्रदर्शन को प्रशासनिक स्विकृती न मिलने के कारण,यहां भारी पैमाने पर पुलिस बन्दोबस्त लगाया गया था और शुरूवाती दौर में अनेक प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। फिर भी दिन चढ़ते चढ़ते जंतर मंतर पर हजारों की संख्या में लोग जुट गये और जंतर मंतर ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार) गो बैक के नारों से गूंज उठा । इस दौरान मोदी और शाह के खिलाफ भी जमकर नारे लगे।दिल्ली की तुलना में मुम्बई में पुलिस वालों का रूख थोड़ा नरम दिखाई दिया और यहां के शिवाजी पार्क के पास, बिना परमीशन के भी हजारों की संख्या में युवाओं का हुजूम जमा हो गया। काॅकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों की तरफ से यहां जमकर भाषणबाजी भी की गई और ज्ञानेश कुमार सहित प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर भी जमकर निशाना साधा गया। काॅकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस अवसर पर यह घोषणा की कि मुम्बई का यह आन्दोलन सिर्फ एक झलक है,इस आन्दोलन का समापन जंतर मंतर पर,ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ जांच के आदैश से होगा।कुल मिलाकर अगर कहें तो गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली और मुम्बई से जो दृश्य सामने आये हैं,वह वर्तमान चुनाव आयोग से आजादी की लड़ाई का संकेत बन गये हैं।



