
भारत के संविधान ने भले ही देश के सभी नागरिकों को समान न्याय का अधिकार दिया हो,मगर संविधान के संरक्षण की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है,उनके भेदभाव वाले कृत्य के कारण,आज यह संविधान बेमानी दिखाई देता है। यूपी में सड़क पर नमाज पढ़ रहे नमाजियों को, जब एक पुलिस वाले की तरफ से लात मारा गया था,तब यूपी के मुख्यमंत्री आदित्य योगिनाथ ने यह तर्क दिया था कि सड़क आम लोगों के आवाजाही के लिए है,नमाज पढ़ने के लिए नही। उसी यूपी में जब सड़कों पर कांवड़ियों द्वारा जमकर उत्पात मचाने के दृश्य सामने आये तो इसी मुख्यमंत्री ने अपने आंखों पर पट्टी बांध ली।कुछ ऐसा ही किस्सा एक मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी के सार्वजनिक रूप से, वर्दी में सलाम वाले कुम कहने पर और एक पुरूष पुलिस अधिकारी के मोहर्रम के जुलूस में भाग लेने पर भी दिखाई दिया था,जब इन दोनों के उपर विभागीय कार्रवाई की गई थी। ऐसे में महाराष्ट्र के पुणे से कुछ ऐसे दृश्य सामने आये हैं, जिसमें अनेक पुलिसकर्मी एक साथ,गणपति विसर्जन के जुलूस में, वर्दी पहने सड़क पर जमकर डांस करते दिखाई दे रहे हैं और सड़क पूरी तरह जाम दिखाई दे रहा है। इस विडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर कुछ लोग यह सवाल कर रहे हैं कि इन पुलिसवालों पर कब कार्रवाई होगी और इन गणेश भक्तों को लात क्यों नही मारा गया ?पुणे में गणपति विसर्जन के दौरान माननीय मुम्बई उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के,उन आदेशों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई गईं,जिसमें न्यायालय ने डीजे के ऊपर पाबंदी लगाई थी। पुरे पुणे में गणपति विसर्जन के दौरान जमकर डीजे बजाया गया,यहां तक कि डीजे के खिलाफ न्यायालय में याचिका दाखल करनेवाले विधानंद बापट, इनके घर के समीप भी,गणपति विसर्जन के जुलूस को रोककर डीजे बजाने की खबर सामने आई है। एकाध जगहों पर गणपति विसर्जन में शामिल युवा डांस करने के दौरान, बेहद अश्लील इशारे भी करते दिखाई दिये। कुल मिलाकर अगर कहें तो मुसलमानों को कदम कदम पर,कानून का पाठ पढ़ानेवाली पुलिस,गणपति विसर्जन के दौरान निर्धारित कानून का पालन कराने में,न केवल नाकाम दिखी बल्कि कानून तोड़नेवालों का साथ देती भी नजर आई।



