50 से ज्यादा सामाजिक सेवा के भूखंडों पर अवैध कब्जा

जिन लोगों ने नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल,अटल सेतू,जेएनपीटी और नवी मुम्बई एसईजेड से प्रभावित होकर, उलवे में अपने सपने के घर को साकार करने का कार्य किया है,वह आज अपने आपको बेहद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बिल्डिंग और क्षेत्रफल के मामले में वैसे तो उलवे नवी मुम्बई के अन्य विकसीत नोड की तरह ही दिखाई देता है,मगर नवी मुम्बई के अन्य विकसीत नोड में जो सामाजिक सुविधायें सिडको द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं,उसका घोर अभाव उलवे में दिखाई देता है। कुछ स्कूलों की बिल्डिंग और रामसेठ ठाकुर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स को छोड़ दें तो बाकि अन्य कोई भी सामाजिक सुविधायें, सिडको ने यहां के लोगों को उपलब्ध नही कराई है। हां इतना जरूर है कि विभिन्न सामाजिक सुविधाओं के नाम पर सिडको ने लगभग 250 भूखंडों को आरक्षित कर रखा है।सिडको द्वारा आरक्षित भूखंडों पर, किसी भी प्रकार की सामाजिक सुविधा विकसीत नही करने के कारण, इनमें से 50 से ज्यादा भूखंडों पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के निजी व्यक्तियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। इतने बड़े उलवे शहर में,लोगों को न तो गार्डेन की कोई सुविधा दी गई है और न ही कोई सार्वजनिक मैदान की। न तो यहां कोई सरकार अधिकृत बड़ा अस्पताल है और न ही सरकार अधिकृत कोई बड़ा स्कूल। यहां तक कि इस शहर में कोई पेट्रोल पंप भी उपलब्ध नही है और लोगों को अवैध पेट्रोल की खरीददारी करनी पड़ रही है। कोई सार्वजनिक बाजार,पुस्तकालय,श्मशान,मनोरंजन केन्द्र,विरंगुला केन्द्र,सामाजिक भवन या महिला भवन की स्थापना अभी तक सिडको की तरफ से यहां नही की गई है।हालात यह हैं कि गांव के जो पुराने श्मशान हैं, वहां शहर के लोगों के अंत्यविधी की मनाही है,ऐसे में अगर शहर में किसी हिन्दु की मौत होती है तो उसके लिए उलवे साईं मंदिर के पास स्थित श्मशान ही एकमात्र जगह है,जहां उसकी अंत्यविधी की जा सकती है। इन सारी परेशानियों को तो शहर के लोग झेल ही रहे हैं,अब उनके सामने नई परेशानी साप्ताहिक बाजार के रूप में सामने आ रही है,जिससे कई नोड में सड़क जाम की ऐसी समस्या पैदा होती है कि उसके चलते अनेकों बार रोड रेज की घटनायें घटती रहती हैं। एक और समस्या यह है कि सिडको जब भी अपने आरक्षित भूखंडों से अतिक्रमण हटाने का प्रयास करती है तो वहां बड़े पैमाने पर सामाजिक तनाव पैदा हो जाता है। हालांकि इस अतिक्रमण में सिडको अधिकारियों की पूरी मिलीभगत होती है,मगर कभी न्यायालय के डर से या दिखावे के लिए अतिक्रमण हटाने का प्रयास भी किया जाता है,तो बड़ा बवाल खड़ा हो जाता है,जिससे आम लोग बेहद भयभीत हो जाते हैं।पूरे उलवे को अगर आप घूम लें तो आपको कहीं भी एक सार्वजनिक शौचालय दिखाई नही देगा और न ही उलवे में अभी तक कोई बस डिपो बनाया गया है। ज्यादातर बस अड्डे भी आपको खुले आसमान वाले दिखाई देंगे। खराब सड़कें,टूटे गटर,गंदगी और वायु प्रदूषण में तो उलवे नवी मुम्बई के किसी भी नोड को पीछे छोड़ने के लिए तैयार खड़ा है। खनन के नियम हों या रेरा के नियम उलवे में इन नियमों का कोई महत्व नही है,यहां बस एक ही नियम लागु है स्थानीय नेताओं की पहचान। इस खबर पर विश्वास न हो तो ‘आइये न एक बार हमारे उलवे में।’



