विपक्ष ने कहा अवैध ईमारत पसंद लेकिन वैध ईमारतों की छोटी गलती पर भी नजर

पिछले पांच साल से नवी मुंबई महानगरपालिका प्रशासक के कब्जे में थी,अर्थात महानगरपालिका आयुक्त के पास ही सारा अधिकार था। मगर जनवरी 2026 में नवी मुम्बई महानगरपालिका पर जनप्रतिनिधियों का शासन स्थापित हो गया, क्योंकी पांच वर्षों से लंबित नवी मुम्बई महानगरपालिका का चुनाव जनवरी 2026 में संपन्न हो गया और यहां पूर्ण बहुमत से बीजेपी सता पर स्थापित हो गई। चुनावी प्रक्रिया के शुरू होने से लेकर आजतक, महाराष्ट्र के वन एवं पर्यावरण मंत्री और नवी मुम्बई के सर्वेसर्वा कहे जानेवाले गणेश नाईक और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे के बीच,आपसी वर्चस्व को लेकर जबरदस्त तनाव देखा जा रहा है। इसी तनाव का एक परिणाम यह सामने आ रहा है कि गणेश नाईक या उनके समर्थकों को, जहां कहीं भी एकनाथ शिन्दे गुट के नगरसेवकों की या नेताओं की कोई कमजोरी नजर आ जाती है, तो वह उसपर हल्ला बोल देते हैं।गणेश नाईक को अंदरूनी तौर पर यह जानकारी हासिल हुई है कि नवी मुम्बई के नगर रचना विभाग के अधिकारियों को मिलाकर, एकनाथ शिन्दे गुट के नेताओं ने रिडेव्हलपमेन्ट के अनेकों प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता की है। इसका पता लगते ही गणेश नाईक अपने समर्थकों के साथ आक्रमक हो गये और उन्होंने अपने नगरसेवकों के जरिए इन अनियमितताओं की खोज और जांच शुरू करा दी। इसी के अंतर्गत घणसोली के सिम्पलेक्स प्रोजेक्ट को और वाशी के नैवेद्य और अलबेला नामक प्रोजेक्ट को सबसे पहले निशाने पर लिया गया। सिम्पलेक्स प्रोजेक्ट का काम तो अभी शुरू भी नही हो पाया है,मगर वाशी सेक्टर 9 में स्थित नैवेद्य और अलबेला नाम की ईमारत न केवल तैयार हो चुकी है बल्कि उसका ओसी भी आ चुका है। मगर गणेश नाईक के समर्थकों ने, नैवेद्य और अलबेला ईमारत में अग्निशमन सुरक्षा के नियमों की बड़ी अनदेखी करने के बाद भी इस ईमारत को,एक बड़े नेता के दबाव में फायर एनओसी दिये जाने का आरोप लगाया है और अब इसके तथ्यात्मक सबूत भी सामने आ चुके हैं।इन दोनों ईमारतों को लेकर आज गणेश नाईक ने स्वयं यह ब्यान दिया कि इन ईमारतों का ओसी रद्द कर जल्द ही इन ईमारतों पर तोड़क कार्रवाई की जायेगी। गणेश नाईक के इस ब्यान के बाद नवी मुम्बई की राजनीति बेहद गरमा गई और शिन्दे सेना से जुड़े लोग यह तर्क दे रहे हैं कि गणेश नाईक के स्वयं के गांव बोनकोड़े और खैरणे में,लगभग 100 पूरी तरह से अवैध बहुमंजिली ईमारतों का निर्माण किया गया है,मगर गणेश नाईक इनके खिलाफ कभी कुछ नही बोलते और जिन ईमारतों को सारे नियम कानून का पालन करते हुए बनाया गया है,उसकी छोटी चूक भी गणेश नाईक को बर्दाश्त नही।



