राज्य सरकार को मुआवजे की राशि, पुलिसवालों से वसूलने की स्वतंत्रता

मुम्बई तपास ने मुम्बई उच्च न्यायालय में चल रहे, नवी मुम्बई के अवैध ईमारतों के सुनवाई के सिलसिले में,कल जो आशंका व्यक्त की थी,आज वह पूरी तरीके से सच साबित हुई और मुम्बई उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया कि नवी मुम्बई महानगरपालिका के जिस महिला विभाग अधिकारी को,अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान किये गये हिंसक विरोध प्रदर्शन के चलते, गर्भपात जैसे गंभीर शारिरीक और मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा,उसे राज्य सरकार 25 लाख रूपये का मुआवजा दो सप्ताह के अंदर प्रदान करे,क्योंकी यह पूरी घटना, घटनास्थल पर मौजूद पुलिसवालों की लापरवाही से घटी है।मुम्बई उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता प्रदान की कि वह चाहे तो मुआवजे की पूरी राशि लापरवाही करनेवाले पुलिसवालों के वेतन से वसूल सकती है। घणसोली के जिस सहायक अभियंता रितेश पुरब को, कुछ लोगों द्वारा धमकाया गया था,उसे निःशुल्क पुलिस संरक्षण देने का फरमान भी न्यायालय ने सुनाया। भविष्य में पालिका या सिडको द्वारा की जानेवाली कार्रवाई के लिए पर्याप्त और मजबूत पुलिस संरक्षण प्रदान करने की हिदायत भी,न्यायालय ने नवी मुम्बई पुलिस प्रशासन को दी। पालिका के द्वारा एफआईआर दर्ज कराये जाने या लिखित शिकायत दिये जाने के बाद भी, जिन पुलिसवालों ने उचित कानूनी कदम नही उठाया,उनकी जांच का आदेश भी न्यायालय ने जारी किया है।कुल मिलाकर अगर कहें तो न्यायालय ने यह साफ संकेत दे दिया है कि भविष्य में होनेवाले,किसी भी तोड़क कार्रवाई में अगर सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा से पुलिस प्रशासन द्वारा कोई भी खिलवाड़ किया गया,तो इसका पूरा खामियाजा राज्य सरकार को भुगतना पड़ेगा। अब देखना यह है कि उच्च न्यायालय के इस कड़े निर्णय के बाद भी,भू माफियाओं के सबसे बड़े संरक्षक रबाले पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत के खिलाफ,नवी मुम्बई पुलिस आयुक्त मिलींद भारंबे कोई कड़ा कदम उठाते हैं या नही।



