सिडको की फेन्सिंग चुराकर,किये जा रहे हैं अवैध निर्माण कार्य

नवी मुम्बई के भू माफियाओं के खिलाफ मुम्बई उच्च न्यायालय भले ही अपना सख्त रूख दिखा रहा हो,मगर भू माफियाओं का जो अवैध गठबंधन सिडको,नवी मुम्बई महानगरपालिका,स्थानीय पुलिस स्टेशन और एमएसईबी के अधिकारियों के साथ स्थापित है,उसके आगे मुम्बई उच्च न्यायालय का आदेश बेहद तुच्छ नजर आता है। मुम्बई तपास की रिसर्च टीम ने जो विश्लेषण किया है,उसमें स्थानीय पुलिस स्टेशन का सहयोग इन भू माफियाओं को सबसे ज्यादा मिलता दिखाई दे रहा है।मुम्बई तपास ने इससे पहले भी अवैध बहुमंजिली ईमारतों के निर्माण में,नवी मुम्बई पुलिस के भ्रष्टाचारी सहयोग के उपर एक खबर प्रकाशित की है,जिसमें कई तथ्यात्मक सबूतों का उल्लेख हमारी तरफ से किया गया था। नवी मुम्बई महानगरपालिका प्रशासन द्वारा मुम्बई उच्च न्यायालय को संतुष्ट करने के लिए,अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अबतक करीब 1200 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कराये गये हैं और सैकड़ों की संख्या में एफआईआर की सिफारिश अभी भी पेन्डिंग हैं। इनमें सबसे ज्यादा एफआईआर रबाले पुलिस स्टेशन के अंतर्गत दर्ज कराये गये हैं,क्योंकी इस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत नवी मुम्बई महानगरपालिका के घणसोली और ऐरोली दो विभाग कार्यालय आते हैं। मगर दुर्भाग्य से रबाले पुलिस स्टेशन पूरी तरीके से, भूमाफियाओं को अपना संरक्षण देता नजर आता है। इस पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत सहित उनके अन्य साथीदार अधिकारियों द्वारा कैसे भू माफियाओं को संरक्षण प्रदान किया जाता है,इसके कई दस्तावेजी सबूत मुम्बई तपास की रिसर्च टीम के पास उपलब्ध है। यहां तक कि नवी मुम्बई के पुलिस आयुक्त मिलिन्द भारंबे और संबंधित पुलिस उपायुक्त और सहायक आयुक्त सब इस बात से परिचित हैं,इसके सबूत भी मुम्बई तपास की रिसर्च टीम के पास उपलब्ध हैं। कैसे भू माफियाओं को संरक्षण देने के लिए, गंभीर दखलपात्र गुनाहों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज नही की जाती,कैसे भू माफियाओं के ईशारे पर सिडको और नवी मुम्बई महानगरपालिका की तोड़क कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध नही कराये जाते, कैसे अवैध ईमारतों के पानी और बिजली कनेक्शन कट करने के लिए,मांगी गई सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है और कैसे जिस ईमारत की नींव के समय में ही एफआईआर दर्ज करा दी गई है,वह ईमारत आज छः मंजिल की बनकर तैयार खड़ी है,इन सबके दस्तावेजी सबूत मुम्बई तपास की रिसर्च टीम के पास उपलब्ध है। एक केस तो ऐसा सामने आया है,जिसमें सिडको ने अपने जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए जो जीआई पतरे की फेन्सिंग की थी,उसे भी भू माफियाओं ने चुराकर उस जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की,इस मामले में सिडको की तरफ से रबाले पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराया गया है और इसमें सिडको के लगभग दो लाख दस हजार के माल के चोरी की बात कही गई है। इस मामले में आरोपी की पहचान करने के बाद भी पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नही की।अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सारी प्रशासनिक यंत्रणायें, पहले से ही भू माफियाओं का साथ दे रही हों और उसमें पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह शामिल हो जाये,तो इस शहर के नियोजन की रक्षा के लिए जो लोग संघर्ष कर रहे हैं और भू माफियाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं,उनके जान माल की रक्षा कौन करेगा?



