मुम्बई उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त तक,प्रतिज्ञापत्र देने को कहा

नवी मुम्बई जैसे सुनियोजित शहर में, बहुत बड़े पैमाने पर किये गये अवैध निर्माण कार्य के मुद्दे पर मुम्बई उच्च न्यायालय का रूख दिनोंदिन कठोर होता जा रहा है। नवी मुम्बई महानगरपालिका,सिडको,एमआईडीसी और पुलिस प्रशासन के गंभीर समर्थन से नवी मुम्बई में हजारों की संख्या में अवैध बहुमंजिली ईमारतों का निर्माण,सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करके किया गया है। इसका खूलासा 2013 में ही मुम्बई उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हो चुका था। मगर भू माफियाओं के साथ नवी मुम्बई महानगरपालिका,सिडको,एमआईडीसी और नवी मुम्बई पुलिस के संबंधित अधिकारियों के अवैध गठजोड़ और राज्य सरकार की रेगुलराइजेशन पाॅलिसी के कारण, इस जनहित याचिका के आदेश को कचड़े की टोकरी में डाल दिया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में एडवोकेट किशोर शेट्टी की तरफ से नवी मुंबई के अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ एक और जनहित याचिका दाखिल की गई। इस जनहित याचिका के आदेश को भी जब कचरे की टोकरी में डालने का प्रयास किया गया,तब किशोर शेट्टी ने न्यायालय अवमान याचिका दाखिल कर दी और अब यह मामला जस्टिस गडकरी और कमलखट्टा की बेंच में सुने जाने के कारण बेहद गंभीर रूप ले चुका है।इसके अंतर्गत पहली बार पालिका के कुछ पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिरी है। अब न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर राज्य सरकार से यह सवाल किया है कि इतने सारे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी,अवैध निर्माणों की संख्या दिनोंदिन क्यों बढ़ती जा रही है। न्यायालय ने इसपर एक विस्तृत प्रतिज्ञापत्र दाखिल करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। यह प्रतिज्ञापत्र राज्य सरकार को 11 अगस्त के अंदर दाखिल करना है। न्यायालय ने इस दौरान उन अवैध निर्माण कार्यों पर अविलंब कार्रवाई करने का निर्देश नवी मुम्बई महानगरपालिका को दिया है,जिनका निर्माण कार्य अभी भी जारी है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पीछले कुछ वर्षों से जिस रेगुलराइजेशन की बात राज्य सरकार अपने विभिन्न जी आर में कर चुकी है,उसपर वह अडिग रहती है या न्यायालय की गंभीरता को देखते हुए, वह कोई अलग रूख अपनाती है।



