करोड़ों रूपये की लागत से बनाई गई बिल्डिंग 7 साल में धोकादायक घोषित

पूरे महाराष्ट्र में विकास के नाम पर लूट का जो सिलसिला चल रहा है,उसमें सिडको ने नवी मुम्बई में कार्यरत सभी सरकारी संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है। बड़े बड़े भूखंड घोटाले हों या निविदा घोटाले सबमें सिडको का भ्रष्टाचार चरम पर दिखाई देता है। मुम्बई तपास को सिडको के अग्निशमन विभाग के सूत्रों के हवाले से जो खबर हासिल हुई है, उसके मुताबिक करोड़ों रूपये की लागत से उलवे में बनाये गये,अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के निवास स्थान की तीन बहुमंजिली ईमारतों को मात्र सात साल में ही धोकादायक घोषित कर दिया गया है और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से ईमारत खाली करने का निर्देश जारी किया गया है। अग्निशमन विभाग के सूत्रों ने मुम्बई तपास को बताया कि इन ईमारतों का निर्माण कार्य वर्ष 2017 में शुरू किया गया था और इसका उद्घाटन 2019 में हुआ था। मगर यह ईमारतें 7 सालों में ही धोकादायक स्थिती में पहुंच गई और अब उनको गिराने की पहल शुरू कर दी गई है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि सिडको का कोई भी संबंधित अधिकारी इस संदर्भ में मुंह खोलने को तैयार नही है। सिडको की जनसंपर्क अधिकारी प्रिया रतांबे से भी जब मुम्बई तपास ने संपर्क किया तो उन्होंने ऑफिसियल मीटिंग में होने का बहाना बनाकर,सच्चाई बताने से इंकार कर दिया। सवाल यह उठता है कि मुम्बई तपास को मिली जानकारी अगर सही है, तो सिडको ने संबंधित ठेकेदार और अपने संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कोई विभागीय,आपराधिक और आर्थिक दंड की कार्रवाई क्यों नही की,और अगर यह खबर गलत है तो मुम्बई तपास को सच बताने से परहेज क्यों किया गया ?



