विधान भवन मार्च के दौरान पुलिस के सामने बेहद आक्रमक दिखी पोपेटा

जो काम बड़े बड़े प्रकल्पग्रस्त नेताओं के आन्दोलन से नही हो पाया, या जिस मुद्दे पर सारे बड़े प्रकल्पग्रस्त नेता हिम्मत हारकर बैठ गये थे,उस मुद्दे को रश्मिता पोपेटा नामक एक ग्रामीण महिला ने अपने आन्दोलन से फिर से जिन्दा कर दिया। हम बात कर रहे हैं नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल के नामकरण की,जिसे प्रकल्पग्रस्तों के मसीहा दि बा पाटिल साहब का नाम दिये जाने की मांग सभी प्रकल्पग्रस्त एक स्वर में करते दिखाई देते हैं।इसको लेकर पूर्व सांसद रामसेठ ठाकुर,उरण के विधायक महेश वालदी,भिवंडी के वर्तमान सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा,जे एम म्हात्रे,कैबिनेट मंत्री गणेश नाईक,विधायक मंदा म्हात्रे,विधायक प्रशांत ठाकुर, शेतकरी कामगार पक्ष के नेता बालाराम पाटील,जे एम म्हात्रे, शिवसेना नेता बब्बन पाटिल आदि के नेतृत्व में एक बहुत बड़े संयुक्त आन्दोलन को जन्म दिया गया था,मगर केन्द्र और राज्य सरकार के पास,इन सारे नेताओं की काली कमाई का पूरा कच्चा चिठ्ठा मौजूद था,इसलिए इस आन्दोलन को आसानी से दबा दिया गया।मगर रश्मिता पोपेटा नामक एक साधारण सी ग्रामीण महिला ने, नवी मुम्बई अंतरराष्ट्रीय विमानतल को दि बा पाटील साहब का नाम दिये जाने को लेकर मरणोपर्यंत आमरण अनशन की घोषणा कर दी और अनशन शुरू भी कर दिया। शुरूवाती दौर में उसके इस आन्दोलन या अनशन को कोई खास समर्थन हासिल नही हुआ,मगर धीमे धीमे इस महिला की जिद को देखकर कुछ प्रकल्पग्रस्त युवा इस आन्दोलन के समर्थन में उतरने लगे। इस बीच रश्मिता पोपेटा की शारिरीक हालत दिनोंदिन बिगड़ने लगी,इस स्थिती ने सामान्य प्रकल्पग्रस्तों को और भड़का दिया और यह आन्दोलन बहुत तेजी से तिव्र होने लगा और इससे मजबूरी में बड़े बड़े प्रकल्पग्रस्त नेताओं को भी जुड़ना पड़ा,क्योंकि इस आन्दोलन में प्रकल्पग्रस्त नेताओं के खिलाफ भी आक्रमक नारे लगने लगे थे।8 जुलाई को इन आन्दोलनकारियों की तरफ से,विधान भवन मार्च की घोषणा की गई थी। इस मार्च में भाग लेने के लिए हजारों की संख्या में प्रकल्पग्रस्त कलंबोली सर्कल पर इकठ्ठा होने लगे। प्रकल्पग्रस्तों को अपना समर्थन देने के लिए भिवंडी के सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा, शेतकरी कामगार पक्ष के नेता बालाराम पाटिल और शिवसेना यूबीटी नेता बब्बन पाटिल भी पहुंचे। मगर पुलिस ने इस मार्च के शुरूवाती दौर में ही सभी आन्दोलनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान रश्मिता पोपेटा की आक्रमकता देखने लायक थी। वह उस पुलिस गाड़ियों के काफिले के आगे भारी बारिश में भी सड़क पर लेट गईं, जिन वाहनों से हिरासत में लिए गये आन्दोलनकारियों को रोड पाली स्थित पुलिस स्टेशन में ले जाया जा रहा था। बाद में महिला पुलिसकर्मियों ने बेहद मशक्कत करके रश्मिता पोपेटा को भी हिरासत में ले लिया।रश्मिता पोपेटा के इस आन्दोलन से सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान रामसेठ ठाकुर के परिवार,जे एम म्हात्रे के परिवार,महेश वालदी और महेन्द्र घरत जैसे नेताओं को होने की संभावना है, जिन्होंने प्रकल्पग्रस्तों के नाम का इस्तेमाल कर सैकड़ों करोड़ की अवैध संपति अपने और अपने परिवार के नाम पर की है।



