गजब की सरकार,धंधे चलाने की अनुमति भी और फिर अवैध वसूली भी

पूर्व गृहमंत्री स्वर्गीय आर आर पाटील द्वारा डांस बार और लेडीज बार पर लगाई गई पाबंदी को लेकर, डांस बार मालिकों को वर्षों तक न्यायालय में संघर्ष करना पड़ा,तब जाकर उन्हे डांस बार और लेडीज बार शुरू करने की इजाजत कुछ पाबंदियों के साथ मिली। इसमें ग्राहकों की टेबल के सामने डांस करने की मनाही और डांस करनेवाली लड़कियों पर पैसा लूटाना मना था। इसके बाद डांस बार शुरू हुआ और पूरे राज्य में इसका विस्तार होने लगा।मगर यही डांस बार धीमे धीमे पुलिस की अवैध कमाई के साथ साथ कुछ पत्रकारों और कुछ तथाकथित समाजसेवकों की भी अवैध कमाई का साधन बनने लगा। इसमें पुलिस अपने गुर्गों को भेजकर, लड़कियों के डांस करती हुई विडियो को निकालकर डांस बारों पर कार्रवाई की धमकी देकर, बार मालिकों से अवैध वसूली करने लगे । लगभग यही थ्योरी कुछ पत्रकारों और तथाकथित समाजसेवकों सहित कुछ राजनीतिक पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी भी अपनाने लगे और अपना मासिक हफ्ता फिक्स करने लगे। मगर ऐसा लगता है कि अब सीधे विधायकों की नजर डांस बार के व्यापार पर पड़ने लगी है और वह विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर अपना फायदा करने की कोशिश में जुट गये हैं। क्योंकी कभी एक विधायक किसी एक क्षेत्र के डांस बार की बात करता है तो दूसरा विधायक किसी और क्षेत्र की। इन विधायकों को राज्य में लगातार बढ़ रही उन मसाज पार्लर या देह व्यापार के धंधों से कोई परेशानी नही है,जहां चंद षैसों के लिए महिलाओं को अपने जिस्म के साथ सौदा करना पड़ता है और पराये पुरूषों के नंगे बदन पर मालिश करनी पड़ती है। मगर जहां लड़कियां अपनी कला को बेचकर थोड़ा ज्यादा पैसे कमा रही हैं,उनसे इन विधायकों को आजकल बहुत परेशानी हो रही है। अब यह तय करना मुश्किल है कि मजबूरी में महिलाओं को अपना जिस्म बेचना अच्छा है या फिर अपने कला को बेचना, इसका फैसला राज्य के विधायकों पर ही छोड़ना अच्छा है।



