“डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर लोगों से लाखों की ठगी

जयपुर | विशेष रिपोर्ट | मुंबई तपास न्यूज़
जयपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाता था। आरोपी लोगों को फोन कॉल और वीडियो कॉल के जरिए धमकाकर उनसे लाखों रुपये ठगता था। पुलिस के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और अब इसके पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सबसे पहले लोगों को कॉल कर खुद को क्राइम ब्रांच, सीबीआई या साइबर सेल का अधिकारी बताता था। इसके बाद वह पीड़ितों को कहता था कि उनके नाम पर किसी अवैध गतिविधि, मनी लॉन्ड्रिंग या साइबर अपराध का मामला दर्ज हुआ है। आरोपी लोगों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे बैंक डिटेल्स और पैसे ट्रांसफर करवाता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक रिटायर्ड व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि आरोपी ने उसे “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर कई घंटों तक वीडियो कॉल पर रखा और फिर लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। शिकायत मिलने के बाद जयपुर पुलिस की साइबर टीम ने तकनीकी जांच शुरू की और आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पुलिस ने आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। पुलिस या सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहतीं। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
पुलिस की लोगों से अपील
- किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
- बैंक डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- “डिजिटल अरेस्ट” जैसी धमकियों से घबराएं नहीं।
- साइबर ठगी की शिकायत तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर करें।
मुंबई तपास न्यूज़
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